नलखेड़ा। नईदुनिया न्यूज

भारतीय किसान संघ की ब्लॉक इकाई ने बुधवार को तहसील कार्यालय पहुंचकर शासन की भावांतर भुगतान योजना को लेकर तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें किसानों ने योजना के तहत जिले में फसलों का औसत उत्पादन बढ़ाए जाने की मांग की।

भाकिसं द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में किसानों ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा भावांतर भुगतान योजना के तहत आगर-मालवा जिले के लिए औसत उत्पादकता मापदंड तय किया गया है। जिसमें सोयाबीन 657 किलो ,उड़द 2.20 किलो ,मूंग 2.45 किलो ,मक्का 2.67 किलो के मान से प्रति हेक्टेयर तय किया गया है, जो कि बहुत ही कम है। यह किसानों के साथ छलावा है। भावांतर भुगतान योजना के तहत कम मात्रा में शासन किसानों से उपज खरीदेगा। ऐसी स्थिति में किसानों को अपनी बची हुई उपज कम मूल्य पर व्यापारियों को बेचने के लिए विवश होना पड़ेगा। जिले में फसलों की औसत उत्पादकता कम होने के कारण किसानों को शासन की अनेक योजनाओं में अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान होता है। 6 अक्टूबर को संभागीय मुख्यालय पर आगर जिले की औसत उत्पादकता बढ़ाने के संबंध में भाकिसं की जिला इकाई द्वारा ज्ञापन दिए जाने के बाद भी अभी तक किसी प्रकार का औसत उत्पादकता में सुधार नहीं किया गया है।

16 से पहले संशोधन की मांग

भाकिसं ने जिले की फसलों की औसत उत्पादकता 16 अक्टूबर से पूर्व संशोधित कर सुनिश्चित किए जाने की मांग की। साथ ही चेतावनी देते हुए बताया कि ज्ञापन के पश्चात भी संशोधन नहीं किया गया तो मजबूरन भाकिसं किसानों के हित में आंदोलन करते हुए एवं भावांतर योजना की प्रतियां तहसील मुख्यालय पर विरोधस्वरूप जलाई जाएंगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के रामनारायण तेजरा, जगदीश पाटीदार, रामनारायण गुर्जर, उमेश पाटीदार, भंवरसिंह खींची सहित आदि कई भाकिसं पदाधिकारी-कार्यकर्ता व किसान मौजूद थे।

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