Naidunia
    Thursday, April 26, 2018
    PreviousNext

    न बैक लाइट न रिफ्लेक्टर, चलती-फिरती मौत बने ट्रैक्टर-ट्रॉली

    Published: Mon, 16 Apr 2018 09:35 PM (IST) | Updated: Mon, 16 Apr 2018 09:35 PM (IST)
    By: Editorial Team

    लापरवाही : नियमानुसार नहीं चल रहे, कृषि के नाम पर हो रहा व्यावसायिक उपयोग

    नलखेड़ा। नईदुनिया न्यूज

    ट्रैक्टरों का पंजीयन भले ही कृषि उपयोग के लिए किया जाता हो लेकिन कृषि के अलावा व्यावसायिक तौर पर ट्रैक्टरों का उपयोग सबसे अधिक किया जा रहा है। सबसे अधिक खनिज सामग्री ढोने के काम में इनका उपयोग होता है। रात में सड़क पर चलते इन वाहनों में कई कमियां होने के कारण दूसरे वाहन चालकों के लिए खतरा बना रहता है।

    इन ट्रैक्टरों में न तो बैक लाइट रहती है न ही रेडियम रिफ्लेक्टर। इन दोनों प्रमुख खामियों के चलते रात में पहले भी अनेक बार ट्रैक्टर ट्रालियों से वाहन चालकों के टकराने से कई हादसे भी हो चुके हैं। विडंबना यह है कि इतना सब कुछ होते रहने के बाद भी परिवहन विभाग ऐसे ट्रैक्टर-ट्रालियों पर कार्रवाई नहीं करता है।

    रेत और गिट्टियों का परिवहन

    नगर सहित तहसील में अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रालियों पर रेत, ईंटें, सीमेंट, सरिए, लकड़ियां, गिट्टी ,मुरम आदि ढोए जाते हैं जबकि परिवहन विभाग इनका पंजीयन कृषि उपयोग के लिए करता है। ऐसे में ये नियमों की अनदेखी तो कर ही रहे हैं साथ ही इन्होंने आमजन का सड़क पर चलना भी खतरनाक बना दिया है। ट्रॉलियों में क्षमता से अधिक वजन भरने के बाद कई बार इनके पलटने की घटनाएं भी हो चुकी हैं। तहसील क्षेत्र में अनेक बार ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलिया पलट चुकी हैं।

    अप्रशिक्षित चालक

    नगर सहित तहसील के ग्रामों में अंधाधुंध गति से दौड़ रहे अधिकांश ट्रैक्टरों को अप्रशिक्षित चालक चला रहे हैं। ट्रैक्टरों का व्यावसायीकरण होने के बाद गांव से अप्रशिक्षित चालकों को ट्रैक्टर पकड़ा दिए जाते हैं। बगैर ड्राइविंग लाइसेंस के इन चालकों को यातायात नियमों की जानकारी नहीं रहती है। ऐसे में अधिकांश दुर्घटनाओं के मामले सामने आते हैं। जिनमें चालकों की गलती ही रहती है।

    इधर बस वाले भी सुधरने को तैयार नहीं

    प्रतिदिन ओवरलोड बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। जिनमें से कई बसों के न तो परमिट हैं और न फिटनेस व बीमा। नियमों को ताक पर रखकर कंडम बसों का संचालन किया जा रहा है। इन बसों के अनफिट होने के बाद भी उनमें क्षमता से अधिक संवारियां भरी जा रही हैं। कंडम बसों के साथ ही उनमें आपातकालीन द्वार भी नहीं लगवाए जा रहे हैं। बसों में न तो फर्स्ट एड बॉक्स है और न ही अग्निशामक यंत्र। इस आग बरसाने वाली भीषण गर्मी के समय में यात्रियों को बसों की छतों पर बैठाया जा रहा है और यात्री भी अपनी जान जोखिम में डाल निसंकोच बैठ भी रहे हैं। विभागीय कार्रवाई का डर तो जैसे सभी के लिए समाप्त हो चुका है। भारी संख्या में यात्रियों को बैठाकर उनकी जान व सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। हर कोई खुलेआम परिवहन और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। यह मनमानी एक दिन बड़ी जनहानि और हादसे का कारण बन सकती है।

    और जानें :  # nalkheda. news
    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें