शाजापुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए दहेज प्रताड़ना के चलते आत्महत्या करने वाली महिला के पति को दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

लोक अभियोजक विवेक शर्मा ने बताया कि शहनाजबी निवासी बोरसाली का विवाह निजामउद्दीन पिता सलामउद्दीन (23) निवासी रेवांगज सारंगपुर के साथ हुआ था। शादी के कुछ माह बाद ही पति निजाम ने अपने ससुराल फोन लगाकर कहा कि वे शहनाज को ले जाएं। शहनाज के पिता गब्बु खां एवं माता अमीना बी शहनाज को लेने आए। शहनाज ने बताया था कि उसकी सास जुलेशा बी व पति निजाम दहेज में मोटरसाइकल व फ्रीज नहीं देने की बात पर मारपीट करते हैं। शहनाज के पिता ने निजाम को समझाया कि मेरे पास अभी दहेज की व्यवस्था नहीं है लेकिन निजाम नहीं माना। इस पर माता-पिता अपनी बेटी शहनाज को घर ले गए। कुछ दिनों बाद निजाम के नाना यूनुस खां, दादा रमजानी खां व मां जुलेशा बी शहनाज को फिर लेने के लिए बोरसाली गए। मायके वालों ने उसे भेजने से इंकार कर दिया लेकिन ससुराल वालों ने भरोसा दिलाया कि शहनाज को तकलीफ नहीं होगी। इस पर शहनाज को उनके साथ भेज दिया। लेकिन करीब एक सप्ताह में हीं निजाम का फिर फोन आया कि शहनाज को ले जाओ। इस पर शहनाज का भाई नौशाद उसे लेकर बोरसाली आ गया लेकिन यहां शहनाज ने 23 सितंबर 2015 को ससुराल वालों से परेशान होकर कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली। मामले में सुंदरसी पुलिस ने आरोपीगण के विरुद्घ धारा 304 बी भादवि अपराध क्रमांक 116-17 प्रथम सूचना के तहत रिपोर्ट लिखी। मामले में पुलिस द्वारा आरोपियों के विरुद्घ न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। मामले में सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने आरोपी पति निजामउद्दीन को अपराध धारा 304 बी भादवि में दस वर्ष का सश्रम कारावास, धारा 498 ए भादवि में दो वर्ष कारावास तथा 2 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा न करने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास आरोपी को भुगतान होगा।

--------------------