- खरीदी कें द्रों पर भी पहुंचे अफसर, भीगे गेहूं को सुखाने की कवायद

- विशेषज्ञों के मुताबिक- गीले होने से प्याज-लहसुन की स्टोरेज क्षमता पर पड़ेगा असर, कि सानों को पहुंचेगा नुकसान

शाजापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

बारिश ने गेहूं के साथ प्याज-लहसुन की सेहत भी बिगाड़ दी है। खेतों में पड़े प्याज-लहसुन के ढेर में गीले हो गए। इससे क्वॉलिटी पर असर पड़ेगा। वहीं उनकी स्टोरेज क्षमता भी कम होगी। नुकसान का आंकलन करने के लिए बुधवार को सर्वे टीमें खेतों में पहुंची, जबकि गेहूं खरीदी कें द्रों पर भी अफसर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। जानकारों का मानना है कि यदि बुधवार को भी बारिश होती तो गेहूं को अधिक नुकसान पहुंचता कि ंतु धूप निकलने से अब सुखाने में ज्यादा समस्या नहीं आएगी।

मंगलवार को जिलेभर में तेज आंधी के साथ बारिश व ओलावृष्टि हुई थी। इस कारण न सिर्फ खरीदी कें द्रों पर गेहूं भीगा बल्कि खेतों में रखी प्याज व लहसुन फसल भी प्रभावित हो गई। खरीदी कें द्रों पर करीब दो लाख क्विंटल गेहूं खुले में था लेकि न दो-तीन दिन से बारिश होने की संभावना के चलते गेहूं को ढांकने की व्यवस्था की गई थी। इसमें से हजारों क्विंटल गेहूं तेज आंधी के साथ हुई बारिश में भीग गया था। दास्ताखेड़ी, दुपाड़ा, मोरटा, सलसलाई, कालापीपल सहित कई कें द्रों पर गेहूं भीगा था।

सुबह होते ही कें द्र व खेतों की तरफ निकले अफसर

समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का जिम्मा जिला विपणन संघ पर है। सभी तरह की व्यवस्थाएं इस विभाग को ही करना है। इस बीच मंगलवार को हुई तेज बारिश व ओलावृष्टि से गेहूं को कहीं अधिक नुकसान तो नहीं हुआ, इसके लिए जिला विपणन अधिकारी प्रदीप ग्रेवाल अपनी टीम के साथ निरीक्षण के लिए पहुंचे। बारिश के बाद गेहूं की स्थिति का जायजा लेने वे गुलाना क्षेत्र के मदाना, भैंसरोद सलसलाई, मंगलाज सहित अन्य सेंटरों का जायजा लेने पहुंचे। खरीदी संस्थाओं से उन्होंने बारिश के दौरान कि ए गए इंतजाम आदि की जानकार ली। बोरियों में भरे अनाज को भी देखा। इसके बाद संबंधित परिवहनकर्ताओं को जल्द से जल्द अनाज के उठाव को लेकर निर्देशित कि या गया। साथ ही गीले गेहूं को सुखाने के निर्देश दिए।

प्याज-लहसुन का भी सर्वे

शाजापुर जिला प्याज उत्पादन के लिए अपनी अलग पहचान बना चुका है। अल्प बारिश के बावजूद जिले में सात हजार हेक्टेयर में प्याज की बुआई की गई है। वर्तमान में फसल पककर तैयार हो चुकी है। खेतों में से फसल को निकालने का काम चल रहा है। मंगलवार को भी जिले के अनेक क्षेत्रों में कि सान इस काम में जुटे हुए थे लेकि न बारिश व ओलावृष्टि से खेतों में रखी फसल भीग गई थी। बुधवार को कि सान खेतों में पहुंचे और फसल को सुखाने के जतन कि ए गए। जिन क्षेत्रों में प्याज व लहसुन फसल निकालकर खेतों में रखी हुई थी, उनमें पानी लगने से क्वॉलिटी पर असर पड़ेगा। हालांकि सूखने के बाद वह फिर से पहले की तरह हो जाएगी लेकि न लंब समय तक स्टोर करने की क्षमता पर विपरीत असर पड़ेगा।

अधिकारी का दावा- मौसम खुल गया, नुकसानी जैसी बात नहीं

जिला विपणन अधिकारी ग्रेवाल ने बताया कि कई के ेंद्रों का निरीक्षण कि या है। गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए समितियों द्वारा प्रयास कि ए गए। अब मौसम भी खुल गया है। खरीदे गए गेहूं में नुकसानी जैसी कोई बात नजर नहीं आई है। भविष्य में भी बारिश जैसी यदि स्थिति बनती है तो खरीदी संस्थाओं को व्यवस्थाएं जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।

मटेवा में मृत दंपती के परिजन को देंगे आर्थिक सहायता

जिले की मोहन बड़ोदिया तहसील के गांव मटेवा में मंगलवार देर शाम बिजली गिरने से पति-पत्नी की मौत हो गई। मृतक सिद्धनाथ पिता नारायणलाल भील उम्र 40 साल और उसकी पत्नी ललिता उम्र 35 वर्ष है। दोनों अपने जंगल स्थित खेत पर गए थे तभी बारिश होने लगी और दोनों बबूल के पेड़ के नीचे खड़े हो गए। इसी दौरान दोनों पर आकाशीय बिजली गिर गई और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। देर रात तक ग्रामीणों को हादसे की जानकारी नहीं लग पाई थी।

जानकारी लगने के बाद रात में ही मोहन बड़ोदिया तहसीलदार मुन्ना अड़ और पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद शव को पीएम के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। बुधवार को दोनों का अंतिम संस्कार कि या गया। मंगलवार को बिजली गिरने से जिले में तीन लोगों की मौत हुई थी। मटेवा में पति-पत्नी के अलावा पीरखेड़ी में रणजीतसिंह की मौत हुई थी। रणजीतसिंह शासकीय मावि मोरटा में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। एसडीएम यूएस मरावी ने बताया प्राकृतिक आपदा के तहत राशि का प्रावधान है। प्रकरण बनाकर परिजनों को राहत राशि दी जाएगी।