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    करोड़ों के स्टॉपडेम घोटाले में 43वें आरोपी को भी सजा

    Published: Thu, 15 Feb 2018 07:47 PM (IST) | Updated: Thu, 15 Feb 2018 07:47 PM (IST)
    By: Editorial Team

    - कोर्ट ने दो साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई और 40 हजार 500 रुपए का जुर्माना किया

    - 42 आरोपियों को जनवरी में सुनाई जा चुकी है सजा

    शाजापुर। नईदुनिया प्रतिनधि

    करीब 31 साल पुराने करोड़ों के स्टॉपडेम घोटाले के मामले में कोर्ट ने 43वें आरोपी को भी दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं 40 हजार 500 रुपए का जुर्माना किया। इसी मामले में 42 आरोपियों को पूर्व में सजा सुनाई जा चुकी है। तब 43वें आरोपी के अनुपस्थित रहने के कारण सजा नहीं सुनाई गई थी।

    वर्ष 1986-87 एवं 87-88 में हुए शाजापुर स्टॉपडेम घोटाले में कोर्ट ने 30 जनवरी को बड़ा फैसला सुनाकर 42 आरोपियों को दो-दो साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं 89 लाख रुपए से अधिक का जुर्माना भी किया था। वर्ष 1989 में ईओडब्ल्यू इंदौर ने घोटाले में कुल 63 आरोपी बनाए थे। इनमें शाजापुर के तत्कालीन जल संसाधन ईई समेत एसडीओ, इंजीनियर, लेखापाल व ठेकेदार शामिल थे। जिसमें से 18 आरोपी मर चुके हैं। वहीं दो फरार थे। एक का स्वास्थ्य ठीक नहीं बताया जा रहा था। एडीपीओ एवं मीडिया सेल प्रभारी अजय शंकर ने बताया इस मामले में 43वां आरोपी केदारनाथ तिवारी ठेकेदार निवासी बुधवारिया बाजार उज्जैन भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायालय की न्यायाधीश नीता गुप्ता के समक्ष पेश हुआ। आरोपी केदारनाथ तिवारी को आपराधिक षड्यंत्र के अपराध में धारा 120बी आईपीसी के तहत दो वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 रुपए का अर्थदंड किया गया। वहीं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1947 की धारा 5(1)डी सहपठित धारा 5(2) के तहत दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा और 40 हजार रुपए का अर्थदंड किया। पैरवी उप संचालक अभियोजन प्रेमलता सोलंकी एवं विशेष लोक अभियोजक सचिन रायकवार ने की।

    यह है मामला

    जानकारी के अनुसार वर्ष 1986-87 एवं 1987-88 में अविभाजित शाजापुर जिला (तब आगर भी शामिल) सूखाग्रस्त घोषित किया गया था। इस पर राज्य शासन ने अविभाजित शाजापुर जिले में किसानों व मजदूरों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से कुल 138 स्टॉपडेम बनाने की योजना बनाई थी। जिसमें 75 प्रतिशत राशि किसान व मजदूरों को भुगतान करने एवं शेष 25 प्रतिशत राशि से सामान खरीदा जाना था। इसमें जमकर गड़बड़ी हुई थी। उक्त योजना 5 करोड़ 18 लाख रुपए से अधिक की थी। जिसमें घोटाला सामने आया था। इनमें नियमों का पालन न करते हुए 4 करोड़ रुपए से ज्यादा की सामग्री क्रय कर ली गई थी। वह भी मनमाने दाम पर। जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने मुख्य आरोपी तत्कालीन ईई जलसंसाधन रमाशंकर पिता शिवदुलारे अग्निहोत्री निवासी उप्र समेत कुल 63 आरोपी बनाए थे। प्रकरण के बीच रमाशंकर अग्निहोत्री सहित 18 आरोपी मृत हो गए। इसी प्रकरण में 30 जनवरी को 42 आरोपी के बाद 15 फरवरी को एक और आरोपी को सजा सुनाई गई।

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