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शाजापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिलेभर में दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत गुरुवार से हो जाएगी। शहर सहित विभिन्न चौराहों पर बप्पा को विधि-विधान से विराजित कि या जाएगा। बाजार में प्रतिमाओं की दुकानें सज चुकी हैं जहां 51 रुपए से लेकर 10 हजार रुपए तक की मूर्तियां विभिन्ना स्वरूपों में उपलब्ध हैं। इस बार मिट्टी की मूर्तियों व ईको फ्रेंडली गणेश की मांग ज्यादा है। सुबह से ही श्रद्धालु बैंड-बाजों व ढोल की थाप पर थिरकते हुए बप्पा को लेकर आते दिखाई देंगे। पर्व को देखते हुए होटल प्रतिष्ठानों पर बड़ी मात्रा में मोदक बनाने में हलवाई जुटे हुए हैं। शहर में 100 के लगभग सार्वजनिक पंडालों में विघ्नहर्ता विराजेंगे।

गणेशोत्सव को लेकर विगत कई दिन से तैयारियों का दौर चल रहा है। शहर के नई सड़क, आजाद चौक, सराफा बाजार में अनेक दुकानें लगी हुई है जहां लालबाग के गणेश के प्रतिरूप से लेकर खजराना गणेश वाली प्रतिमाएं भी मिल रही हैं। बाजार में मावा, मोतीचूर, राजगिरा आदि तरह के लड्डू बनाने का काम होटल-प्रतिष्ठानों पर चल रहा हे। बाजार में हार, फू ल, दूर्वा सहित पूजन सामग्री की बिक्री भी जमकर होगी।

हर वर्ग में उत्साह

रिद्धि-सिद्धि के दाता के पर्व को लेकर भक्तों में उत्साह देखते ही बन रहा है। बड़ों से लेकर बच्चों तक हर कोई बप्पा के आने का इंतजार कर रहा है। शहर में आजाद चौक, कि ला रोड, धानमंडी, बस स्टैंड, टेंशन चौराहा, हरायपुरा, काछीवाड़ा, मगरिया, सोमवारिया, महूपुरा चौराहा, टंकी चौराहा, आदर्श कॉलोनी, शरद नगर, नई सड़क, रेलवे स्टेशन कॉलोनी, धोबी चौराहा, इंद्रा नगर, विजय नगर, आदित्य नगर, नवीन नगर आदि स्थानों पर भक्त पंडाल बनाकर गणेशजी की प्रतिमाएं विराजित करेंगे।

मिट्टी की प्रतिमाओं की मांग

गणेशोत्सव मनाने के दौरान लोग पर्यावरण का भी ध्यान रख रहे हैं, इसके चलते पीओपी की प्रतिमाओं की जगह मिट्टी की मूर्तियों की खरीदी कर रहे हैं। यहीं नहीं शहर में अनेक परिवार मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं का निर्माण दो माह पहले से कर रहे हैं। शहर में कई दुकानों पर सिर्फ मिट्टी के गणेश प्रतिमाएं बेची जा रही हैं। हालांकि इनकी कीमत पीओपी की मूर्तियों से ज्यादा है लेकि न फिर भी लोगों द्वारा पर्यावरण हित में इन्हें खरीदा जा रहा है।

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कै ़प्शन-शहर में कई जगह अब मिट्टी की मूर्तियां विक्रय की जा रही हैं।

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सवा हाथ का मंदिर, चार हाथ के गणपति

शाजापुर। शहर के मीरकला बाजार स्थित विघ्नहर्ता का एक मंदिर ऐसा भी है जो शायद सबसे छोटा मंदिर होगा। दरअसल, इस मंदिर की ऊंचाई मात्र सवा हाथ जितनी है लेकि न मंदिर में चार हाथ वाले गणेशजी विराजित हैं।

शहर में शाहजहां कालीन कि ला बना हुआ है सन्‌ 1600 में बने इस कि ले के निर्माण के साथ ही कि ला रोड, मीरकला, सोमवारिया व कसेरा बाजार चार प्रवेश द्वार बनवाए गए थे। इनमें से मीरकला दरवाजे पर स्थित गणेश मंदिर सभी की आस्था का कें द्र है। यहां की पूजन-पाठ व सेवा समीप की दुकान संचालित करने वाले गुप्ता परिवार के लोग करते हैं। व्यवसायी प्रकाशचंद गुप्ता बताते हैं कि गणेशजी की सुबह-शाम पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं विशेष अवसरों पर बाबा को चोला चढ़ाया जाता है। उन्होंने बताया कि मंदिर काफी प्राचीन है।

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कै ़प्शन-प्राचीन सवा हाथ का गणेश मंदिर।