विधानसभा चुनाव : शाजापुर-सुसनेर सीट में भाजपा-कांग्रेस को जमकर पहुंचा नुकसान, आगर-शुजालपुर में भी रहा खतरा

- शाजापुर सीट पर भाजपाईयों ने ही बढ़ाई मुश्किलें, सुसनेर पर कांग्रेसी हुए बागी के साथ

ईश्वरसिंह परमार

शाजापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

शाजापुर-आगर जिले में बंपर वोटिंग के बाद भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशी अब भितरघातियों का हिसाब लगाने में लगे हैं। भितरघात की वजह से कहां, कि तना नुकसान हुआ और जीत-हार में कि तना फर्क पड़ेगा जैसे एक-एक बिंदु पर भाजपाई एवं कांग्रेसी मंथन कर रहे हैं। भितरघात ने शाजापुर व सुसनेर सीट पर दोनों ही पार्टियों को जमकर नुकसान पहुंचाया है। यहां दोनों ही पार्टी के बागी मैदान में थे। ऐसे में कई नेता-कार्यकर्ता खुलकर मैदान में उतरे तो अधिकांश अंडरग्रांउड तरीके से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को नुकसान पहुंचाने में लगे रहे। यही हाल आगर, शुजालपुर व कालापीपल सीट पर भी रहे। हालांकि , इन सीटों पर खुलकर कोई सामने नहीं आया।

शाजापुर से भाजपा के बागी जेपी मंडलोई ने ताल ठोंकी थी। मतदान वाले दिन उनका चुनाव चिन्ह 'चाबी' खूब चला था। पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की 1938 वोटों से जीत हुई थी। इसलिए भाजपाईयों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। यदि मंडलोई को अधिक वोट मिले तो सीधा-सीधा भाजपा को ही नुकसान पहुंचना है। मंडलोई भी जीत का दंभ भर रहे हैं। कांग्रेस में बेचैनी की वजह भितरघात ही है, क्योंकि प्रत्याशी हुकु मसिंह कराड़ा व उनके समर्थक ही प्रचार में दिखें, जबकि पूर्व सांसद सज्जनसिंह वर्मा गुट शुजालपुर में लगा रहा। सुसनेर सीट पर भाजपा-कांग्रेस दोनों में ही भितरघात की वजह से नफा-नुकसान का आंकलन लगाया जाने लगा है। दोनों पार्टी के प्रत्याशियों को 'अपनों' से ही ज्यादा खतरा रहा है। मतदान होने के बाद दोनों पार्टी के नेता भितरघातियों की सूची बनाने में लगे हैं। ताकि पार्टी से निष्कासित कि या जा सके । भाजपा मतदान से पहले ही बागी प्रत्याशी समेत 11 को बाहर का रास्ता दिखा चुकी है।

बंपर वोटिंग को बता रहे फायदा

शाजापुर सीट पर भितरघातियों से नफा-नुकसान का आंकलन लगाते हुए प्रत्याशी व समर्थक बंपर वोटिंग को उनके लिए अच्छा मान रहे हैं। यहां 82.85 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, जो पिछले चुनाव से डेढ़ फीसदी ज्यादा है। भाजपाई इसे सरकार-प्रत्याशी के पक्ष में बता रहे तो कांग्रेसी सरकार के विरोध में। वहीं निर्दलीय खुद के पक्ष में माहौल होने की बात कह रहे हैं। भाजपाई यह भी स्वीकार रहे कि भितरघात से सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं की पार्टी को है। ठीक यही स्थिति सुसनेर सीट पर भी है। बता दें कि शाजापुर जिले में औसत 82.22 प्रतिशत और आगर जिले में औसत 83.40 प्रतिशत मतदान हुआ है।

पांचों सीटों पर यह रही स्थिति

शाजापुर : इस सीट पर भाजपा-कांग्रेस दोनों में ही गुटबाजी खुलकर सामने आई। बागी जेपी मंडलोई के समर्थन में कई भाजपाई अंदरुनी तरीके से सपोर्ट करते रहे तो कई खुलकर भी सामने आए। पार्टी ने मंडलोई सहित 11 नेता-कार्यकर्ताओं को बाहर का रास्ता भी दिखा दिया। कांग्रेस में भी यही हालात रहे। एक धड़ा शुजालपुर प्रत्याशी के समर्थन में काम करता रहा। कराड़ा समर्थक अके ले ही भाजपा-निर्दलीय से कि ला लड़ाते रहे।

शुजालपुर : टिकट वितरण के बाद कांग्रेस प्रत्याशी रामवीरसिंह सिकरवार का विरोध हुआ लेकि न एक-दो दिन में ही सिकरवार ने सबको मना लिया। अन्य दावेदार सिकरवार के समर्थन में उतरे लेकि न भितरघात का खतरा बरकरार रहा। भाजपा ने इंदरसिंह परमार को टिकट दिया तो कई नेताओं ने अंदरुनी तरीके से विरोध में काम करना शुरु कर दिया। कई भाजपा नेता या तो घर में बैठे रहे या फिर दूसरी विधानसभा में प्रचार करने पहुंचे।

आगर : भाजपा की गढ़ इस सीट पर अबकी बार प्रत्याशी मनोहर ऊंटवाल के सामने पार्टी के नेताओं की ही चुनौती रही है। दो पूर्व विधायक तो प्रचार करने भी नहीं निकले। मौजूदा विधायक गोपाल परमार दूसरी विधानसभाओं में प्रचार करते हुए दिखे। कांग्रेस के विपिन वानखेड़े के सामने स्थानीय नेताओं की नाराजगी चुनौती रही। हालांकि , भाजपा से मुकाबले की जब बारी आई तो सभी साथ हो लिए। फिर भी भितरघात की स्थिति बनी रही।

सुसनेर : इस सीट पर कांग्रेस के ही नेता राणा विक्रमसिंह बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़े। इससे प्रत्याशी महेंद्रसिंह परिहार की मुश्किलें बढ़ी रही, क्योंकि कांग्रेस का एक धड़ा राणा के साथ रहा। इधर, भाजपा प्रत्याशी मुरलीधर पाटीदार भी अलग-थलग दिखे। पाटीदार के विरोध में कई नेता घर में ही बैठे रहे और चुनाव प्रचार में नहीं उतरे।

कालापीपल : युकां प्रदेशाध्यक्ष कु णाल चौधरी को टिकट मिलने के बाद एक धड़ा विरोध में उतारा था। हालांकि , चौधरी ने सबको मना तो लिया पर अंदरुनी तरीके से भितरघात होता रहा। भाजपा में भी भितरघात का खतरा बरकरार रहा।