हरिओम गौड़, श्योपुर। कुपोषण दूर करने के नाम पर अधिकारी अपनी सेहत कैसे बना रहे इसका ताजा मामला विजयपुर ब्लॉक के कदवई गांव में दिखा। इस गांव में निरीक्षण करने गए महिला एवं बाल विकास विभाग के अफसरों को एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ड्रेस (गुलाबी साडी) में नहीं मिली। इस बात पर अफसरों ने आदिवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कार्रवाई का डर दिखाया। कार्रवाई से बचाने के लिए रिश्वत में मुर्गे की मांग रख दी।

कार्यकर्ता का पति मुर्गा खरीदकर लाया और अफसरों की गाड़ी में रखा, तब वह कार्रवाई न करने पर राजी हुए। दरअसल, 'विजयपुर-वन' परियोजना के सीडीपीओ राघवेन्द्र सिंह धाकड़ और स्निप कार्यक्रम कॉर्डिनेटर धर्मेन्द्र परमार पिछले महीने अगरा क्षेत्र का भ्रमण करने गए थे। जब यह अफसर कदवई गांव के आंगनबाड़ी केन्द्र पर पहुंचे तो वहां कार्यकर्ता राधा आदिवासी ड्रेस में नहीं मिली।

आंगनबाड़ी खुली मिली, बच्चे भी थे और उन्हें पोषण आहार भी मिल रहा था, लेकिन कार्यकर्ता का गुलाबी साड़ी में न होना सीडीपीओ व कॉर्डिनेटर को इतनी बड़ी गलती लगा कि इसे अनुशासनहीनता, सरकार के आदेश का पालन न करना बताते हुए कार्यकर्ता को 15 दिन से लेकर 01 महीने तक का वेतन काटने की कार्रवाई का डर दिखाया।

अफसरों की फटकार से आदिवासी महिला डर गई और गलती की माफी मांगी। इसके बाद स्निप कॉर्डिनेटर धर्मेन्द्र परमार ने कहा कि एक मुर्गा मंगा दो, सीडीपीओ साहब गलती माफ कर देंगे और कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। कार्यकर्ता ने तत्काल अपने पति सेवक आदिवासी को बुलाया। सेवक दौड़कर गांव में गया, एक परिवार जो मुर्गे पालता है, वहां से 500 रुपए का मुर्गा खरीदकर लाया। अफसरों ने यह मुर्गा गाड़ी की डिग्गी में रखवाया और कार्यकर्ता को केन्द्र पर सदैव ड्रेस में रहने की हिदायत देकर चलते बने।

पंचायत में कलेक्टर से भी की शिकायत

महिला एवं बाल विकास विभाग के अफसरों द्वारा रिश्वत में मुर्गा लेने का मामला कलेक्टर तक जा पहुंचा है। दरअसल शनिवार की शाम को कलेक्टर बसंत कुर्रे ने अगरा के सहराने में चौपाल लगाकर ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं। इसी दौरान सहरिया समाज के ब्लॉक अध्यक्ष रामदीन आदिवासी उठे और कदवई गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को कार्रवाई का डर दिखाकर सीडीपीओ व स्निप कॉर्डिनेटर द्वारा मुर्गे की घूंस लेकर गए हैं।

समाज के अध्यक्ष ने कहा कि हमारे बच्चों के नाम पर अफसर अपना कुपोषण दूर कर रहे हैं। इस पर कलेक्टर कुर्रे ने भरोसा दिलाया कि ऐसे लालची अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी।

'कलेक्टर को बता दिया'

कदवई की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राधा आदिवासी ने गुलाबी साड़ी नहीं पहनी थी, बस इसी बात पर उसे नौकरी से निकालने से लेकर वेतन काटने तक की धमकी दी और निरीक्षण करने आए अफसर घूस में मुर्गा ले गए। मैंने यह बात कलेक्टर साहब को बता दी है, देखते हैं वह क्या कार्रवाई करते हैं।

-रामदीन आदिवासी सहरिया समाज ब्लॉक अध्यक्ष, अगरा

'मैंने ऐसा काम नहीं किया'

कलेक्टर साहब को यह शिकायत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने नहीं की, बल्कि किसी और व्यक्ति द्वारा की गई है। मैं ऐसा कोई काम नहीं करता, स्निप कॉर्डिनेटर मुर्गा लाया होगा। मुझे कुछ सामान लाना होता है तो अपने पैसों से लाता हूं।

-राघवेन्द्र सिंह धाकड़ सीडीपीओ, विजयपुर

'हम कुछ नहीं कर सकते'

सीडीपीओ ने मुर्गा नहीं मांगा होगा। हमारा कोई भी अधिकारी ऐसा काम नहीं कर सकता। किसी प्राइवेट संस्था का आदमी मुर्गा ले आया है तो इसमें हम कुछ नहीं कर सकते।

-बसंत कुर्रे कलेक्टर, श्योपुर

झूठी शिकायत करवाई

उस दिन मैं सीडीपीओ साहब के साथ निरीक्षण करने गया था, अकेला नहीं था। जो व्यक्ति शिकायत कर रहा है वह किदवई गांव का भी नहीं है। मेरे खिलाफ किसी ने झूठी शिकायत करवाई है।

-धर्मेन्द्र सिंह परमार स्निप कॉर्डिनेटर, विजयपुर