श्योपुर-विजयपुर। पोषण पुनर्वास केन्द्र (एनआरसी) में भर्ती रहने वाले कुछ कुपोषित बच्चे की सेहत में सुधार नहीं हो रहा। अलबत्ता कई बच्चे ऐसे हैं, जिनका वजन एनआरसी में बढ़ने के बजाय घट गया और हाथ-पांव भी सूख गए। ऐसे में एनआरसी की प्रक्रिया पर ही सवालिया निशान लगने शुरू हो गए हैं।

विजयपुर तहसील के झारबड़ौदा गांव निवासी कमल आदिवासी का 11 माह का बेटा रोहित गंभीर कुपोषण की चपेट में है। रोहित की नाजुक हालत देखकर महिला एवं बाल विकास विभाग के ग्रोथ मॉनिटर अरविंद कुमार ने 15 फरवरी को उसे विजयपुर एनआरसी लेकर आए। लेकिन विजयपुर एनआरसी ने रोहित को रखने से हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद रोहित को जिला अस्पताल रेफर किया गया।

तीन दिन तक रोहित का जिला अस्पताल में इलाज चला। 18 फरवरी को उसे जिला मुख्यालय की एनआरसी में भर्ती करवा दिया। 14 दिन तक रोहित श्योपुर एनआरसी में रहा डॉक्टर, पोषण सलाहकार व अन्य स्टाफ की निगरानी में रहा।

जब रोहित को विजयपुर से श्योपुर भेजा गया तब उसका वजन 4.575 किलो था और एमयूएसी (बाजुओं की मोटाई) 9.5 सेंटीमीटर थी। 14 दिन तक रोहित एनआरसी में रहा और 02 मार्च को जब वह एनआरसी से रिलीव होकर गांव पहुंचा, तब उसका वजन 4.500 किलो और एमयूएसी 8.5 सेंटीमीटर था। यानी एनआरसी में भर्ती रहने के दौरान उसका 25 ग्राम वजन कम हो गया और एक सेंटीमीटर हाथ की मोटाई कम हो गई।

एनआरसी से आने के बाद लगातार घट रहा वजन

गंभीर कुपोषण से जूझ रहे रोहित को कुपोषण के साथ निमोनिया भी है। निमोनिया से राहत मिली तो अब उसे चर्मरोग की बीमारी ने घेर लिया। शुक्रवार को रोहित का फॉलोअप चेकअप जिला एनआरसी में होना था, लेकिन रोहित के पिता ने श्योपुर आने से इनकार कर दिया। ऐसे में उसका ग्रोथ मॉनिटर उसे विजयपुर एनआरसी ले गया। एनआरसी में रोहित को तौला गया तो उसका वजन 4.160 किलो निकला। यानी एनआरसी से आने के बाद 340 ग्राम वजन और घट गया।

11.5 एमयूएसी यानी जीवन पर संकट

कुपोषण की पहचान बच्चे के वजन और उसके बाजू की मोटाई (एमयूएसी टेप) से होती है। महिला एवं बाल विकास विभाग 11.5 एमयूएसी को गंभीर कुपोषण और ऐसे बच्चों के जीवन पर संकट मानता है। 11 माह के रोहित का एमयूएसी 8.5 से 9 सेमी तक रह रहा है, यानी उसकी हालत बेहद नाजुक है। अगर स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग नहीं चेता तो बालक की जान भी जा सकती है।

इनका कहना है

- इस बच्चे को निमोनिया था इसलिए वह जल्दी कवर नहीं कर सका। इसके अलावा कई बच्चों में जन्मजात बीमारियां होती हैं, जिस कारण उनकी सेहत में जल्द सुधार नहीं होता। फॉलोअप चेकअप यहां नहीं हुआ। हम विजयपुर से पता लगाते हैं बच्चा अब कैसा है।

डॉ. संजय मंगल एनआरसी, प्रभारी

- हमारी सरकार कुपोषण को लेकर गंभीर है। एनआरसी में भर्ती रहने के बाद बच्चों की सेहत में सुधार क्यों नहीं हो रहा, क्या कमियां हैं, इसकी समीक्षा करके इन्हें दूर किया जाएगा।

बाबू जंडेल विधायक श्योपुर