श्योपुर। नसबंदी ऑपरेशन के दौरान मृत महिला के शव का पोस्टमार्टम श्योपुर में नहीं हो सका। आधी रात को पोस्टमार्टम किए जाने पर परिजनाें के अलावा पूर्व विधायक बृजराज सिंह चौहान ने भी आपत्ति जताई और स्वास्थ्य विभाग पर मामले को दबाने के आरोप लगाए।

इसके बाद महिला का पोस्टमार्टम ग्वालियर मेडिकल कॉलेज में कराने का फैसला लिया गया। रात में ही महिला का शव ग्वालियर भेजा गया, लेकिन पोस्टमार्टम के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं भेजे। इस कारण ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टराें ने दूसरे दिन शुक्रवार की दोपहर तक शव का पोस्टमार्टम नहीं किया।

गौरतलब है कि गुरुवार की शाम को बड़ौदा अस्पताल में लगे नसबंदी शिविर में ऑपरेशन के दौरान नयागांव ग्राम पंचायत के बाराभैरू गांव निवासी माया (30) पत्नी राजाराम आदिवासी की मौत हो गई थी। यह नसबंदी का ऑपरेशन सीएमएचओ डॉ. एनसी गुप्ता ने किया था। परिजनाें का आरोप है कि नसबंदी ऑपरेशन में जल्दबाजी की गई इसलिए, माया की मौत हो गई।

उधर सीएमएचओ महिला की मौत को सदमे में होना बता रहे हैं। महिला की मौत रात 8 बजे हुई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग इस मामले को रफा-दफा करने में जुट गया। रात में ही महिला के शव के पीएम की तैयारी कर ली। रात 11 बजे जैसे ही पीएम के लिए महिला का शव पोस्टमार्टम रूम में ले जाया जा रहा था तो पूर्व विधायक बृजराज सिंह और महिला के पति राजाराम ने पीएम श्योपुर में न कराने की बात कही।

पूर्व विधायक ने कहा कि, जब महिला की मौत के आरोप सीएमएचओ पर लग रहे हैं तो उन्हीं के अधीन कर्मचारियों से पीएम क्यों करवाया जा रहा है। पूर्व विधायक ने आधी रात को पीएम पर भी सवाल किए। इसका असर यह हुआ कि स्वास्थ्य विभाग और पीएम के पूरे कागजात तैयार करके बैठी कोतवाली पुलिस ने रात में पीएम न कराने के फैसले से पीछे हटे और शव को रात 12 बजे ग्वालियर रवाना कर दिया। परिजन माया का शव लेकर तड़के 4 बजे ग्वालियर मेडिकल कॉलेज पहुंच गए।

पहले तो बताया गया कि जाते ही शव का पीएम हो जाएगा, लेकिन शव का पीएम कराने के लिए परिजनों को पूरे 12 घंटे तक मेडिकल कॉलेज में बैठना पड़ा। क्योंकि पीएम के लिए जो पुलिस के दस्तावेज चाहिए थे वह पूरे कागजात श्योपुर से नहीं भेजे। जब मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने पीएम करने से इंकार कर दिया तब आनन-फानन में श्योपुर एसपी का एक आदेश व्हाट्सअप के जरिए मेडिकल कॉलेज के अफसरों को दिया गया। तब कहीं जाकर 4 बजे पीएम हुआ।

इनका कहना है

मेरी पत्नी की मौत ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर की लापरवाही के कारण हुई है। उसने जल्दबाजी की इसलिए यह हादसा हुआ है। रात में मुझे डॉक्टरों ने 50 हजार रुपए का चेक दिया है जो मेेरे पास रखा है। मुआवजा नहीं चाहिए। न्याय चाहिए। जिस डॉक्टर के कारण मेरी पत्नी की मौत हुई है, उस पर एफआईआर की जाए।

राजाराम आदिवासी मृत महिला का पति


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