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    सहरिया समाज : मां-बाप की देखभाल न करने वाली संतान पर लगेगा जुर्माना

    Published: Wed, 14 Feb 2018 07:35 PM (IST) | Updated: Thu, 15 Feb 2018 07:38 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    ढोढर/कराहल। मां-बाप को बेसहारा छोड़ने और मां-बाप का खर्च न उठाने वाले बेटों को आदिवासी समाज दंडित करेगा। ऐसी संतान पर पहले 500 रुपए बाद में 5 हजार का जुर्माना किया जाएगा। इसके बाद भी अगर बेटा नहीं माना तो उसे समाज से बाहर कर दिया जाएगा। यह निर्णय बुधवार को ढोढर के कलोनी गांव में हुई आदिवासी समाज की महापंचायत में हुआ।

    गौरतलब है कि आदिवासी समाज द्वारा गठित समाज सुधार समिति गांव-गांव में जाकर महापंचायत कर समाज में व्याप्त कुरीतियों को मिटाने के लिए कदम उठा रही है। बुधवार को कलोनी गांव में हुई बैठक में फैसला हुआ कि जो माता-पिता अपने बच्चे को 5 से 10 दिन लगातार स्कूल नहीं भेजता, उस पर समाज 100 रुपए का जुर्माना किया जाएगा। समाज की कोई भी युवती या महिला मोबाइल नहीं रखेगी।

    मोबाइल पर बात करनी भी है तो वह घर के किसी सदस्य के सामने बात करेगी। साथ ही दूसरी जाति में शादी करने वाली युवतियों को समाज से बाहर किया जा रहा है। बैठक में बतौर मुख्य अतिथि सीताराम आदिवासी, विशेष्ा अतिथि शिवपुरी सहरिया समाज के वरिष्ठ नेता संत सिंह आदिवासी, प्रदेश सचिव, सहरिया विकास परिषद विनोद लांगुरिया, मुकेश मल्हात्रा, इंद्राज झिलमिलिया, रामदास, सुरेश ढोडिया, छोटेलाल सेमरिया, हरिविलास आदिवासी आदि मौजूद थे।

    शादियों में नहीं बजेगा डीजे

    आवदा में हुई आदिवासी समाज की बैठक में शादी समारोहों में बजने वाले डीजे साउंड पर प्रतिबंध लगा दिया है। कोई भी शादी में डीजे बजाएगा तो उस परिवार को समाज से बहिष्कार कर दिया जाएगा। इसके पीछे का कारण यह बताया गया कि डीजे पर नाचने के लिए युवा शराब पीते हैं फिर युवतियों से अभद्रता तक होती है। बाढ़ गांव के आदिवासी पंच सत्यभान आदिवासी ने बताया कि पंचायत में फैसला हुआ कि आदिवासी समाज के शादी समारोहों में अब ढोलक, ढपली और आदिवासियों का पारंपरिक वाद्य यंत्र केसू ही बजाया जाएगा।

    गुटखा खाने पर युवक पर 500 का जुर्माना

    इन पंचायतों के बाद आदिवासी गांवों में मॉनीटरिंग के लिए समितियां भी गठित कर दी हैं। इसके तहत जो भी व्यक्ति बैठक में तय हुई बातों का पालन नहीं करेगा तो उस पर तत्काल एक्शन लिया जाएगा। चूंकि समाज सुधार समिति ने किसी भी तरह के नशे पर प्रतिबंध लगा दिया है और पहली बार नशा करते पाए जाने पर 500 रुपए के जुर्माने का दंड तय किया है। इसके तहत पहली कार्रवाई पारोंद गांव में हुई। पारोंद गांव का हरिविलास आदिवासी को गुटखा खाते हुए निगरानी समिति के सदस्यों ने पकड़ लिया। उस पर तत्काल 500 रुपए का जुर्माना लगा।

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