शिवपुरी। नईदुनिया प्रतिनिधि

शहर में कई वर्षों से बंद पड़ा संग्रहालय अभी कुछ ही समय पहले शुरू हुआ है। संग्रहालय में शिवपुरी के इतिहास से लेकर, जैन कला, बौद्घ प्रतिमाएं व 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की प्रदर्शनी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। दिव्यांगों को आने जाने के लिए यहां अलग से रैंप बनाया गया है। वहीं आंखों से दिव्यांगों के लिए यहां प्रवेश द्वार के पास ही ब्रेल लिपि में इतिहास दर्शाया है, जिससे वह भी यहां की पुरातत्व विधा को आसानी से समझ सकेंगे। पुरातत्व विभाग के निदेशक डीएन ढिमरी ने संग्रहालय के बेहतर डिजाइनिंग और कामकाज के लिए इंचार्ज संग्रहालय राजेंद्र यादव की सराहना की। जब उनसे पूछा गया कि क्या दूसरी मंजिल पर भी शेष बची मूर्तियों को लगाया जाएगा, तो वह बोले कि हम इसकी प्लानिंग कर रहे हैं।

9 महीने पहले बनकर तैयार हो गया था संग्रहालय

पिछले 12 साल से बंद पुरातात्विक महत्व के जिला संग्रहालय को आम आदमी के लिए खोल दिया गया है। यह पूर्ण रूप से बनकर तैयार था, लेकिन बीते 9 माह से इसका उद्घाटन नहीं हो पा रहा था। इस उद्घाटन को लेकर कई बार अखबारों में खबरें प्रकाशित हुई, जिसके बाद प्रशासन का ध्यान इस इमारत की ओर खिंचा। जहां पुरातत्व विभाग से आए दिशा निर्देश के बाद अंततः इसकी शुरूआत कर दी गई। इसमें तीन गैलरियों में 9 से 11 वी शताब्दी की पुरातात्विक धरोहर को संजोया गया है। इसमें इनके इतिहास, पुरातत्व की समरी और चित्रों के साथ सिक्कों और जैन मूर्तियों के वैभव को करीने से प्रस्तुत किया गया है।

यहां न केवल जैन तीर्थंकरों की 9 से 11वीं शताब्दी की चित्ताकर्षक, मनोहारी प्रतिमाएं हैं, जो खुदाई में नरवर, राजगढ़ और आस पास के कस्बों और गांवों से प्राप्त हुई है। वरन हिंदू धर्म की कई मूर्तियां और प्रतीक तत्समय के इतिहास से हमें रूबरू कराते हैं। इसके अलावा मुगल कालीन सिक्के, चांदी और अष्टधातु के सिक्कों सहित यहां कई तरह की पेंटिंग भी है, जो दर्शाती थीं कि किस तरह से मुगलकाल में चित्रकारी कला का प्रादुर्भाव हुआ था। मुगल और राजपूत काल के कई अन्य सामग्रियां भी यहां पर्यटकों की रिझाती हैं। इसके बंद होने से पर्यटक सन 2006 से यह सब देखने से वंचित रहे। यानि 12 साल से पर्यटक इसके खुलने की बाट जोह रहे थे।

भित्ति चित्रों के साथ आदि मानव गुफा आकर्षण का केंद्र

यहां प्रवेश द्वार के समीप केमिकल ट्रीटमेंट से आदि मानव गुफा का निर्माण कराया गया है। इस गुफा में भित्ति चित्रों के माध्यम से बताया गया है कि किस तरह से हमारा आदिमानव जीवन था। इसके साथ-साथ कई शैल चित्र और पुरातात्विक सामग्री इस संग्रहालय को अनूठा बनाती है।

सिंधिया राजवंश के सिक्कों के साथ आदि मानव काल की संस्कृति का प्रदर्शन

इस संग्रहालय में सिंधिया राजवंश के सिक्कों के साथ आदि मानव काल की संस्कृति का प्रदर्शन किया गया है। इसमें मुहर बताई गई है कि सिंधिया राजवंश के समय कौन सी मोहर चलती थी। जब अंग्रेजों का शासन काल आया तो कौन सी मोहरें चली। इनके अलावा तात्याटोपे और महारानी लक्ष्मीबाई के जीवन से जुड़े पहलुओं को भी सचित्र प्रस्तुत किया गया है। इसमें तोप, बंदूक, दो नाली बंदूक, टोपीदार बंदूक के साथ तलवार अस्त्र-शस्त्र और बर्तन मटके आदि शामिल हैं।

तीन गैलरियों में रखी है पुरातत्व महत्व की संपदा

गैलरी 1 में शिवपुरी का प्रारंभ प्रागैतिहासिक काल से लेकर सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को प्रदर्शित किया गया है। वीथिका का दरवाजा शैलाश्रय में खुलता है, जिसमें प्रागैतिहासिक मानव दिखाए गए हैं।

गैलरी 2 में में ब्राह्मण व बौद्घ कला को प्रदर्शित किया गया है, जिसमें सुरवाया गढ़ी का प्रतिरूप, ध्यानस्थ कुलिश, मंदिरों के द्वार बौद्घ प्रतिमाएं, मुद्रांक सहित कई सूचनाएं हैं। गैलरी-3 में जैन कला व धरोहर को प्रदर्शित किया गया है, जिसमें 12-13 वी शताब्दी की 24 तीर्थंकरों की मूर्तियों के साथ उनका केस विन्यास और उनका विवरण पर्यटकों को आकर्षित करता है।

फोटो : 12 शिव 3, 4, 5, 6

कैप्शन : संग्रहालय में आदिमानव के जीवन को दर्शाती हुई मूर्ति,

फोटो : 12 शिव 4

कैप्शन : संग्रहालय में लगी 11वीं-12वीं शताब्दी. ई. की अंधकासुर वध-मूर्ति

फोटो : 12 शिव 5

कैप्शन : पाषणकाल के पत्थर।

फोटो : 12 शिव 6

कैप्शन : बंदूकों को देखते हुए पर्यटक