शिवपुरी। नईदुनिया प्रतिनिधि

सरकारें बदलती रहीं लेकिन पिछले 20 साल से सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाला अल्प वेतन भोगी शिक्षकों का एक संवर्ग लगातार संघर्ष करता चला आ रहा है। कभी वेतन को लेकर तो कभी नाम को लेकर संघर्षरत अध्यापक अब जिला, जनपद पंचायत व नगरीय निकायों के कर्मचारी नहीं रहेंगे बल्की शिक्षा विभाग के कर्मचारी कहलाएंगे। राज्य शिक्षा सेवा नाम के इस कैडर में अध्यापकों को शामिल करने के आदेश जारी होने लगे हैं। पहली बार ये आदेश ऑनलाइन जारी किए जा रहे हैं। अब तक जिले के 6 हजार अध्यापकों में से आधे से ज्यादा के आदेश जारी हो चुके हैं और विभाग का दावा है कि अगले 10 दिन में सभी अध्यापकों के आदेश जारी हो जाएंगे। 20 साल में इस संवर्ग का कैडर चौथी बार बदला गया है। 1998 में शिक्षाकर्मी फिर 2001 में संविदा शिक्षक इसके बाद 2007 में अध्यापक संवर्ग और अब इस वर्ग को राज्य शिक्षा सेवा कैडर में शामिल किया गया है।

पगार में 3 से 8 हजार रुपए तक का होगा इजाफा

कैडर बदलने से जहां इस संवर्ग का पदनाम बदल जाएगा अब तक प्रायमरी स्कूलों में पढ़ाने वाले सहायक अध्यापक अब प्राथमिक शाला शिक्षक, मिडिल स्कूलों में पढ़ाने वाले अध्यापक अब माध्यमिक शाला शिक्षक, जबकि हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूलों में पढ़ाने वाले वरिष्ठ अध्यापक अब उच्च माध्यमिक शाला शिक्षक कहलाएंगे। इस कैडर के बाद जहां इस संवर्ग का विलय जहां शिक्षा विभाग में हो जाएगा वहीं इन्हें 1 जुलाई 2018 से सातवें वेतनमान का भी लाभ मिलने लगेगा। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इस कैडर में आने के बाद इस वर्ग को मासिक पगार में करीब 3 से 8 हजार रुपए तक का फायदा होगा।

वेरीफिकेशन कोड के फेर में अटके कई आदेश

पिछले महीने भर से इस संवर्ग के नए कैडर के आदेश के लिए काम दिन रात चल रहा है। इस कार्य को देख रहे शिक्षा विभाग के स्थापना शाखा के संतोष कोष्ठा, नरेन्द्र सिंह सेंगर व रामकृष्ण रघुवंशी ने बताया कि जिले में वरिष्ठ अध्यापक 143 हैं जिनके आदेश लोक शिक्षण संचालनालय से जारी होंगे और उनकी फाइल भोपाल भेज दी गई है जबकि अध्यापक 1274 हैं जिनमें से 1218 के आदेश संयुक्त संचालक ग्वालियर द्वारा जारी किए जा चुके हैं जबकि 4500 सहायक अध्यापकों में से 2615 के आदेश जारी हो चुके हैं। 900 सहायक अध्यापकों के वेरीफिकेशन कोड में भिन्नाता के कारण नए सिरे से आदेश अपलोड करने का काम चल रहा है जबकि 1 हजार सहायक अध्यापक ऐसे हैं जिनकी फाइलों में त्रुटि के कारण फिलहाल प्रकरण लंबित हैें जिन्हें अगले चरण में जारी किया जाएगा।

पहली बार डिजीटल हस्ताक्षर से मिल रहे ऑनलाइन आदेश

इस बार स्कूल शिक्षा विभाग ने पूरी प्रक्रिया के लिए तकनीकि सहारा लिया है। ई -सर्विस बुक अपडेशन से लेकर फाइलिंग का कार्य ऑनलाइन किया गया। इतना ही नहीं नए कैडर में नियुक्ति के आदेश भी ऑनलाइन जारी किए जा रहे हैं जिनमें पहली बार डिजीटल हस्ताक्षर का उपयोग किया गया है। यानि आदेश प्राप्त करने के लिए इस वर्ग को कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे बल्की निरधारित वेबसाइट से अपने लोग इन पासवर्ड के जरिए ये अपना आदेश हासिल कर सकेंगे।

अब 1994 वाले कैडर की कर रहे मांग

चुनाव से पहले तत्कालीन सरकार ने सातवें वेतनमान के साथ राज्य शिक्षा सेवा कैडर देने का प्रस्ताव कैबिनेट में पास किया था और उसी के क्रम में यह प्रक्रिया चल रही है ,लेकिन अध्यापक तत्समय से ही इस नवीन कैडर की बजाय उन्हें 1994 में तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार द्वारा डाइंग घोषित किए गए शिक्षक कैडर की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस ने भी इसे अपने वचन पत्र में शामिल किया था। ऐसे में यदि वर्तमान में काबिज कांग्रेस सरकार ने अपनी घोषणा पर अमल किया तो जल्द ही पांचवीं बार इस संवर्ग का पदनाम और कैडर बदल जाएगा।

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कैप्स्न-अध्यापकों को नए कैडर के आदेश जारी करने के लिए डीईओ कार्यालय में काम करते कमेटी के सदस्य।