-कल्चरल इवेंट

-जनजातीय संग्रहालय में सिद्घा समारोह में गायन और नृत्य प्रस्तुति

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में शक्ति की महिमा पर केंद्रित तीन दिवसीय सांस्कृतिक समारोह सिद्घा के दूसरे दिन चिरजा गायन एवं कथक शैली में साध्वी देवी के स्वरूप पर आधारित नृत्याभिनय की प्रस्तुतियां संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर हुईं। कार्यक्रम की शुरुआत नेहा चारण ने अपने साथी कलाकारों के साथ चिरजा गायन से की, जिसमें उन्होंने बंदिश 'तेरो चाकर करे पुकार' प्रस्तुत करते हुए क्रमशः 'करनल किनियाणी श्री चरणाम','हिवड़ो हरषायो', 'निहारा राज री बाट', 'अब तो सुनले', 'किनियाणी थारी सूरत' प्रस्तुत किया। इसके बाद 'खम्मा-खम्मा इन्द्र बाई' प्रस्तुत कर दर्शकों को भक्ति भाव से सराबोर कर दिया। नेहा ने अपने साथी कलाकारों के साथ 'बार-बार करूं विनती' और भैरवनाथ केंद्रित बंदिश पेश करते हुए अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। गायन के दौरान नेहा चारण का साथ ढोलक पर खान मीर ने, हारमोनियम पर सुखदेव ने और करताल पर मेहबूब ने दिया।

नृत्य में नवदुर्गा का यशोगान

गायन के बाद प्रो.मांडवी सिंह के निर्देशन में कथक शैली में साध्वी देवी के स्वरूप पर आधारित नृत्याभिनय की प्रस्तुति हुई। प्रारंभ में कलाकारों ने देवी स्तुति पर नृत्य प्रस्तुत कर किया। देवी स्तुति के बाद देवी के नौ स्वरूपों को मंच पर बिम्बित कर उनका यशोगान किया। इसके बाद कलाकारों ने अपने नृत्याभिनय कौशल से हिमालय नरेश मैना की पुत्री उमा और भगवान शिव से उनके मिलन की कथा को मंच पर प्रस्तुत किया। नृत्य प्रस्तुति के दौरान मंच पर मंजरी बक्शी, सौम्य भार्गव, प्रताप जंघेल, सम्राट चौधरी, नरेंद्र ध्रुव, सुमेधा गुप्ता, लवली राय, झरना नाईक, गुंजन तिवारी और मिली वर्मा ने अपने नृत्य कौशल से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। नृत्य संरचना में डॉ.देव ज्योति लश्कर ने, प्रकाश परिकल्पना में कमल जैन ने सहयोग किया।