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    चावल रबड़ जैसे खिंचता है और पकाते समय ऊपर तैरने लगता है

    Published: Thu, 07 Dec 2017 08:20 PM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 02:11 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    निवास। विकासखंड अंतर्गत आने वाले सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कैसे खिलवाड़ किया जा रहा है, इसका उदाहरण मध्या- भोजन में मिलने वाले चावल को देख कर लगाया जा सकता है। स्कूलों में मध्या- भोजन व्यवस्था के लिए घटिया चावल का वितरण किया जा रहा है। इन चावलों में बहुत अधिक मिलावट है।

    135 प्राइमरी और 55 मिडिल स्कूल

    बच्चों को दिया जाने वाला यह चावल पकने के बाद, रबड़ जैसे खिंचने और पकाते समय ऊपर तैरने लगता है। यहां तक कि ऐसा चावल अभी तक भोजन बनाने वाली महिलाओं ने नहीं देखा। विकासखण्ड के 135 प्राइमरी और 55 मीडिल स्कूलों में माध्यान भोजन संचालित हो तो रहा है। लेकिन मध्या- भोजन बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करता दिख रहा है।

    ऐसे मिलता है चावल

    मध्या- भोजन का चावल टोकन सिस्टम के माध्यम से राशन दुकानों से सप्लाई की जाती है। शासन द्वारा स्कूलों में रिफाइन चावल भेजने के आदेश को धता बताकर चावल बेहद मोटा कोड़ा और छोटे-छोटे पत्थर मिले भेजा जा रहा है। चावल की जरा सी भी सफाई में लापरवाही होती है तो इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ेगा।

    सरपंचों ने कहा- शिकायत करते हैं पर नहीं होता सुधार

    जानकारी है कि नागरिक खाद्य आपूर्ती निगम से ही घटिया चावल आ रहा है। वहीं अलग-अलग स्कूलों में जाकर देखने से पता चलता है कि नगरीय क्षेत्र के शासकीय स्कूलों में चावल की गुणवत्ता और ग्रामीण क्षेत्र स्कलों की गुणवत्ता में बहुत अंतर है सरपंचों का कहना है कि हर बार शिकायत जिम्मेदारों से करते हैं। इसके बाद भी चावल की गुणवत्ता में कोई सुधार नही होता है।

    बच्चों की उपस्थित 80 खाद्यान्ना आवंटन 65 का होता है

    ब्लॉक में बच्चों की उपस्थिति 80 रहती है। जबकि खाद्यान्न 65 के लिए ही दिया जा रहा है। खाद्यान्न में कटौती के चलते बच्चों के निवाले में कटौती हो रही है। शासन ने प्रति बच्चे के हिसाब से खाद्यान्न तय किया था पर अब उसमें भी कटौती कर जैसे-तैसे योजना को संचालित किया जा रहा है।

    चावल में गुणवत्ता न हो तो न बनाएं: बीआरसी

    बीआरसी से शिकायत इस मामले में निवास बीआरसी सुनील धर द्विवेदी ने बताया कि स्कूल भ्रमण के दौरान अलग-अलग स्कूलों से शिकायत मिली है कि चावल बनाते वक्त तैरने लगता है और बनने के बाद रबड़ जैसे तनता है। शिकायत के बाद सभी स्कूलों को पत्र द्वारा सूचित किया गया है कि चावल में गुणवत्ता न हो तो न बनाया जाए। साथ ही एसडीएम और जिला पंचायत को पत्र द्वारा सूचित किया जा रहा है।

    माध्या- भोजन के लिए आए चावल की शिकायत की गई है। चावल बहुत घटिया है इसे तुरंत वापस होना चाहिए।

    लखन गोटिया , सरपंच, भीखमपुर

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