ग्वालियर। व्यापमं केसों की ट्रायल में अब हिंदी रोड़ा नहीं बन सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसे ढाल बनाकर आरोपित चालान की कॉपी हिंदी में मांग रहे थे और हिंदी में चालान की कॉपी नहीं मिलने तक केस में गवाही नहीं हो पा रही थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब व्यापमं के केसों में सीबीआई फिर से गवाही करा सकती है। एक दर्जन से ज्यादा केसों की ट्रायल फिर से शुरू होगी।

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आरक्षक भर्ती घोटाले के आरोपित नरोत्तम धाकड़ को हिंदी में चालान की कॉपी देने का आदेश दिया था। इस आदेश को हर आरोपित ने आधार बना लिया है और जिला न्यायालय में एक आवेदन पेश किया जा रहा था कि हाईकोर्ट ने नरोत्तम धाकड़ के केस में हिंदी में चालान की कॉपी देने का आदेश दिया है। इसलिए उन्हें भी कॉपी हिंदी में दी जाए।

सीबीआई का पक्ष सुनने के बाद विशेष न्यायालय ने आरोपितों को हिंदी में चालान की कॉपी देने के आदेश दिए। हिंदी में चालान की कॉपी देने के आदेश देने के बाद से फर्जी तरीके से पीएमटी व आरक्षक भर्ती परीक्षा पास करने वाले आरोपितों के खिलाफ चल रही ट्रायल रुक गई। इससे आरोपितों को बड़ी राहत मिल गई, क्योंकि कई केस तो फैसले पर पहुंच गए थे और हिंदी की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहे थे।

गोल्ड मेडलिस्ट ने भी मांगी हिंदी में चालान की कॉपी

- प्रियंका श्रीवास्तव ने फर्जी तरीके से पीएमटी पास की थी। सीबीआई ने प्रियंका के केस में स्वाति सिंह को भी आरोपित किया गया है। स्वाति सिंह उत्तर प्रदेश में पीजी में गोल्ड मेडलिस्ट है, लेकिन उन्होंने चालान की कॉपी हिंदी में मांगी है। स्वाति सिंह सॉल्वर के रूप में परीक्षा देने आई थी। विशाल यादव ने भी हिंदी में चालान की कॉपी मांगी है। जबकि विशाल ने अंग्रेजी में एमबीबीएस की पढ़ाई की है।

- राहुल यादव, गौरव गुप्ता ने सॉल्वर बैठाकर पीएमटी पास की थी। इनके केस में दो गवाह शेष रह गए हैं। आखिरी स्टेज पर केस पहुंच गया है, लेकिन दोनों आरोपितों ने हिंदी में चालान की कॉपी मांग ली और कोर्ट ने उन्हें हिंदी में चालान की कॉपी देने का आदेश दिया है। इनके केस की ट्रायल रुकी हुई है।

- अंग्रेजी में पढ़ाई करने वालों ने हिंदी में चालान की कॉपी लेने के लिए पर्याप्त कारण नहीं दिए हैं। आवेदन में उन्होंने लिखा है कि नरोत्तम धाकड़ के केस में हिंदी में चालन की कॉपी देने का आदेश दिया है। इसलिए हमें भी हिंदी में कॉपी दी जाए।

आरोप तय होने से पहले मांग ली हिंदी में चालान की कॉपी

आरक्षक भर्ती घोटाले के आरोपित दिलीप कन्नौजे के खिलाफ सीबीआई ने चालान पेश किया। इस केस में अन्य आरोपितों को क्लीन चिट दे दी। जिस दिन कोर्ट में आरोप तय होने थे, उसी दिन हिंदी में चालान की कॉपी मांग ली और आरोप तय नहीं हो पाए।

शिक्षक भर्ती घोटाले के आरोपित सत्येन्द्र सिंह ने पहले खुद को पागल घोषित करने की कोशिश की, लेकिन उसे राहत नहीं सकी। उसके बाद उसने कोर्ट में एक आवेदन पेश कर हिंदी में चालान की कॉपी मांग ली। जिसके चलते ट्रायल रुक गई।

क्या है नरोत्तम धाकड़ केस

आरक्षक भर्ती घोटाले के आरोपी नरोत्तम धाकड़ को अंग्रेजी नहीं आती है। उसने हिंदी में चालन की कॉपी के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उसे नहीं मिली।

इसके बाद हिंदी में चालान की कॉपी लेने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उसने तर्क दिया था कि अंग्रेजी पढ़ना नहीं आता है। इसलिए हिंदी में चालान की कॉपी प्रदान की जाए। हाईकोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया था कि ट्रायल कोर्ट की भाषा देवनागरी हिंदी है। याचिकाकर्ता को 15 दिन में हिंदी में चालान की कॉपी उपलब्ध कराई जाए।

यह आदेश नवंबर 2017 में दिया था। हाईकोर्ट ने सिर्फ नरोत्तम धाकड़ को हिंदी में चालान की कॉपी देने का आदेश दिया था, लेकिन अंग्रेजी में पढ़ाई करने वाले डाक्टरों ने भी उस आदेश का उपयोग किया। सीबीआई ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की, जिससे उसे बड़ी राहत मिल गई।

एक्सपर्ट व्यू

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत ट्रायल कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने के लिए बाध्य हैं। अब केसों में गवाही कराएंगे।

सौरव वर्मा, विशेष लोक अभियोजक सीबीआई