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    टीकमगढ़ में 11 लाख की छात्रवृत्ति में बांट दिए 53 लाख रुपए

    Published: Fri, 12 Jan 2018 08:39 PM (IST) | Updated: Sat, 13 Jan 2018 10:23 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    टीकमगढ़। सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में बेहतर शिक्षा के लिए प्रदेश सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों को दी जा रही छात्रवृत्ति में बड़ा घोटाला सामने आया है। कॉलेजों की मिलीभगत से सिर्फ टीकमगढ़ के कृषि कॉलेज समेत 10 से ज्यादा कॉलेजों में 42 लाख रुपए की गड़बड़ी हुई है। एक शिकायत के बाद प्रदेश सरकार ने जांच की तो यह खुलासा हुआ है।

    नईदुनिया ने अब तक तैयार हुई जांच के आधार पर तथ्य जुटाए तो टीकमगढ़ में बीते दो सालों में 351 छात्रों को दो से तीन गुना ज्यादा वजीफे की रकम दी गई। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सूत्रों के मुताबिक छात्रों को 11.77 लाख रुपए छात्रवृत्ति बांटी जाना थी लेकिन अफसरों ने 53.61 लाख रुपए का भुगतान कर दिया। यानी अफसरों ने सरकारी खजाने को 41.84 लाख रुपए का नुकसान पहुंचाया। जांच के बाद कॉलेजों में हड़कंप है। सरकार का कहना है कि इस तरह की गड़बड़ी प्रदेश के अन्य जिलों में भी मिल रही है। लिहाजा, सभी जिलों की रिपोर्ट एकजाई करने के बाद कॉलेज प्रबंधन से अतिरिक्त दी गई वजीफे की रकम की वसूली होगी।

    सरकारी कॉलेजों के बराबर दी जानी थी फीस

    नियम यह था कि सरकारी कॉलेजों में कोर्स के लिए तय फीस ही निजी कॉलेजों में मान्य होगी। यानी यदि बीएससी इलेक्ट्रानिक की फीस पांच हजार रुपए है तो प्राइवेट कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र को भी इतनी ही रकम की छात्रवृत्ति मिलेगी। अफसरों ने छात्रवृत्ति का भुगतान करने से पहले एक बार भी नहीं देखा कि फीस में कितना अंतर है। प्राइवेट कॉलेज प्रबंधन ने जितनी फीस बताई उतनी ही सरकार ने दे दी।

    ऐसे पकड़ आई गड़बड़ी

    विभाग को यह सूचना मिली थी कि कई छात्रों को एक से ज्यादा बार छात्रवृत्ति दी गई है। भोपाल से आई टीम ने जब इसकी जांच शुरू की तो पता चला कि बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी की गई है। वर्ष 2014-15 और 2015-16 में पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया। इसके बाद टीकमगढ़, छिंदवाड़ा, कटनी, बैतूल समेत कई जिलों के सहायक संचालकों को नोटिस जारी किए गए।

    यह है नियम

    पिछड़ा वर्ग मैट्रिककोत्तर छात्रवृत्ति नियम 2013 के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग के स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सरकार वित्तीय सहायता मुहैया कराती है। योजना का लाभ उन्हें दिया जाता है जिनके अभिभावकों की सालाना आय एक लाख रुपए से अधिक न हो।

    इनका कहना है

    हमारे यहां टीम आई थी लेकिन कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। आप कलेक्टर कार्यालय से भी इसकी पुष्टि कर लें।

    डॉ. बीएल शर्मा, डीन, कृषि महाविद्यालय

    शिकायत मिलने पर हमने जांच शुरू करवा दी है। जो भी दोषी पाया जाएगा उससे वसूली की जाएगी और आपराधिक प्रकरण भी दर्ज कराया जाएगा।

    ललिता यादव, पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री

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