टीकमगढ़। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर में डॉक्टरों की लापरवाही लगातार बढ़ती जा रही है। जिसे लेकर कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने टीम बनाकर शुक्रवार दोपहर के समय छापामार कार्रवाई की। दोपहर करीब 3 से 4 बजे के बीच कलेक्टर ने टीम के साथ जिला अस्पताल में पदस्थ सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट क्लीनिकों पर छापामारा। इससे पहले कलेक्टर जिला अस्पताल परिसर से सटे सरकारी डॉक्टरों के निवास पर पहुंचे। जहां संचालित प्राइवेट क्लीनिकों को उन्होंने देखा। इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों के कमरों में पहुंचकर भी जायजा लिया और सरकारी आवास में चल रहे क्लीनिकों को सील करने की कार्रवाई की। इस बड़ी कार्रवाई से अन्य सरकारी डॉक्टरों में काफी हड़कंप की स्थिति रही। अन्य डॉक्टर अपने आवास को छोड़कर ही बाहर निकल गए। कलेक्टर ने टीम के साथ करीब एक घंटे तक छापामार कार्रवाई की। इसमें उन्होंने दो सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट क्लीनिकों को सील करने की कार्रवाई की है। वहीं उन्होंने मौके से ही अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों को भी व्यवस्थाएं दुरूस्त करने के निर्देश जारी किए हैं। दरअसल जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर में डॉक्टरों के नदारद रहने की समस्या को नईदुनिया समाचार पत्र द्वारा 12 जुलाई के अंक में प्राथमिकता से प्रकाशित की थी। यह खबर ट्रामा सेंटर में चेंबर के बाहर लगा मरीजों का हुजूम, दो घंटे तक नदारद रहे डॉक्टर शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी। जिस मामले को कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को छापामार कार्रवाई की। जिसमें उन्होंने जिला अस्पताल परिसर में ही बने डॉ अमित शुक्ला के सरकारी आवास पर पहुंचकर छापा मारा। यहां संचालित प्राइवेट क्लीनिक को भी उन्होंने सील करने के निर्देश दिए। कार्रवाई के दौरान कलेक्टर ने क्लीनिक के अंदर जाकर भी निरीक्षण किया, वहीं उन्होंने अधिकारियों को उचित दिशा निर्देश भी दिए। इस दौरान तहसीलदार रोहित वर्मा और अन्य अधिकारियों ने तत्काल क्लीनिक को सील करने की कार्रवाई की। इसके बाद कलेक्टर पूरी टीम के साथ सिविल लाइन रोड स्थित डॉ विकास के निवास पर भी पहुंचे। जहां संचालित क्लीनिक का उन्होंने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने क्लीनिक और पैथोलॉजी लेब को सील करने की कार्रवाई की। करीब आधा से एक घंटे तक कार्रवाई करने के बाद कलेक्टर टीम के साथ निकल गए।

डॉक्टरों में कार्रवाई से मचा हड़कंप

कलेक्टर द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर अन्य सरकारी डॉक्टरों में हड़कंप की स्थिति रही। दोपहर के समय अस्पताल परिसर से सटे सरकारी आवासों में रहने वाले कई डॉक्टर तो अपने आवास ही बाहर कहीं निकल गए। वहीं सिविल लाइन रोड स्थित डॉक्टरों के आवास पर भी सन्नाटा पसर गया, कार्रवाई के दौरान कई डॉक्टरों के आवास पर वहां रहने वाले प्राइवेट कर्मचारियों ने तो ताला ही लगा दिया।

हर दिन बन रही जिला अस्पताल में समस्या

दरअसल जिला अस्पताल में डॉक्टरों की ड्यूटी का समय सुबह 8 से 1 बजे तक और शाम को 5 से 6 बजे तक निर्धारित किया गया है। प्रतिदिन करीब 8 से 10 डॉक्टरों की टीम की ड्यूटी भी अस्पताल में मरीजों के इलाज और उनके परीक्षण के लिए लगाई जाती है, लेकिन 11 जुलाई को नजारा यह रहा था कि सुबह करीब 11 बजे से दोपहर के करीब 1 बजे तक डॉक्टर अपने चैंबर से नदारद थे, जिसके चलते कई मरीज अपना समय पर इलाज नहीं करा पाए। वहीं कई मरीजों को अस्पताल के बाहर प्राइवेट क्लीनिक पर इलाज कराने जाने मजबूर होना पड़ा। सुबह के करीब 9 से 10 बजे से ही ट्रामा सेंटर और अस्पताल में मरीजों का आना शुरू हो गया था। वे अपना परीक्षण और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन जहां डॉक्टरों के चैंबर में कुर्सियां खाली पड़ी थीं। नजारा यह रहा कि मरीजों की एक ओर भीड़ थी, वहीं दूसरी ओर कुर्सियां खाली होने से मरीज काफी निराश हुए थे। जिस मामले को कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने गंभीरता से लिया और शुक्रवार को छापामार कार्रवाई कर डॉक्टरों के क्लीनिक सील किए हैं।

लापरवाही मिलने पर की है कार्रवाई

कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल का कहना है कि जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर में पदस्थ सरकारी डॉक्टरों के द्वारा उनके आवास पर संचालित किए जा रहे प्राइवेट क्लीनिक का निरीक्षण किया गया है, जहां संचालित क्लीनिक को सील किया गया है। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। वहीं जिला अस्पताल में भी अधिकारियों को हर संभव स्वास्थ्य सेवाएं बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को किसी भी प्रकार से असुविधा न रहे।