टीकमगढ़। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिला अस्पताल परिसर में करीब दो साल पहले ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया गया। इस सेंटर पर मरीजों की सुविधाओं के लिए कई कक्ष तैयार किए गए। वहीं डॉक्टरों के कक्ष, दवा वितरण कक्ष, आपरेशन और आईसीयू जैसे कक्षों का भी निर्माण किया गया। लेकिन इस साल हुई बारिश में ट्रॉमा सेंटर के निर्माण की पोल पूरी तरह खुल गई है। पिछले कुछ दिन से शहर मुख्यालय पर चल रही बारिश से ट्रॉमा सेंटर के सबसे महत्वपूर्ण कक्ष आईसीयू गहन चिकित्सा इकाई के ठीक बाहर लेंटर से पानी टपकने लगा है। कुछ स्तर पर लेंटर का छप्पर नीचे क्षतिग्रस्त होकर गिर गया है जिससे बारिश का पानी सीधे आईसीयू कक्ष और आसपास जमा हो रहा है। आलम यह है कि इस ओर न तो अस्पताल प्रबंधन का ध्यान है और न ही संबंधित जिम्मेदार स्वास्थ्य अधिकारी इस ओर ध्यान दे रहे हैं। जिसके चलते यह समस्या ट्रॉमा सेंटर में गंभीर होती जा रही है। लगातार बारिश का पानी कक्ष के बाहर जमा हो रहा है, जिससे रोकने के इंतजाम भी नहीं किए जा रहे हैं। अस्पताल के कर्मचारियों ने जहां खानापूर्ति के लिए प्लास्टिक के तीन छोटे छोटे जरूर रखे हैं। लेकिन जब यह डिब्बे भर जाते हैं तो उन डिब्बों से भी पानी कक्ष के बाहर फैलता रहता है। यह समस्या पिछले एक सप्ताह से ट्रॉमा सेंटर में बड़ी गंभीर होती जा रही है।

दरअसल वर्ष 2016 में जिला अस्पताल परिसर में 13 जून को ट्रॉमा सेंटर का उदघाटन किया गया था। यह उदघाटन जिले के प्रभारी मंत्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर द्वारा किया गया था। जिसकी लागत लगभग 4 करोड़ 88 लाख 16 हजार रुपए थी। इतनी राशि में इस भव्य ट्रॉमा सेंटर का निर्माण कराया गया। लेकिन इस मानसून के मौसम में ट्रॉमा सेंटर के निर्माण की पोल खुल गई है। आईसीयू कक्ष के ठीक बाहर अब नजारा अलग हो गया है। यहां कक्ष के ऊपर बाहरी तरफ लेंटर से पानी टपकने लगा है। जिसके इंतजाम के लिए यहां कर्मचारियों द्वारा प्रतिदिन बाल्टी और प्लास्टिक के डिब्बे रखने का काम किया जा रहा है। लेकिन लगातार बारिश से आईसीयू कक्ष के बाहर पानी जमा होता जा रहा है। जिससे डाक्टरों और मरीजों को काफी असुविधा हो रही हैं इस ओर अस्पताल प्रबंधन का कोई ध्यान नहीं है।

कक्ष के एक ऊपर एक ओर निकली दरार

ट्रॉमा सेंटर में निर्माण को लेकर व्यापक स्तर पर लापरवाही बरती गई है। जिसके चलते आईसीयू कक्ष के गेट के ठीक ऊपर करीब 8 से 10 फुट की दूरी में बड़ी दरार निकल आई है। जिसके ऊपर से की गई पुटीन भी कई जगह से निकल आई है। कक्ष के गेट के ऊपर बने पिलर में यह समस्या पिछले कई दिनों से बनी हुई है। लेकिन अभी तक इसमें सुधार कार्य नहीं कराया जा रहा है। जिसके चलते पिलर कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।

मरीजों और परिजनों को आने जाने में हो रही असुविधा

ट्रॉमा सेंटर में प्रतिदिन सुबह से लेकर शाम तक काफी बड़ी संख्या में मरीजों और उनके परिजनों की आवाजाही रहती है, जिससे यहां मरीजों को आईसीयू कक्ष के बाहर जमा पानी में से बड़े संभलकर निकलना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि कई बार मरीजों को इस कक्ष में आने और ले जाने में परिजनों को खासी मशक्कत करना पड़ रही है। वहीं बुजुर्ग लोगों को भी इस कक्ष के बाहर फिसलने का डर बना हुआ है। कई बार परिजनों ने इसकी सूचना भी अस्पताल प्रबंधन को दी है लेकिन किसी भी अधिकारी ने अभी तक इस असुविधा पर ध्यान नहीं दिया है।

मरम्मत और निर्माण कराई जाए जल्द

समाजसेवी एसके दुबे और अभय ठाकुर ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर का निर्माण करोड़ों की लागत से किया गया है, लेकिन इसके निर्माण कार्य में ठेकेदार स्तर पर जमकर लापरवाही बरती गई है। जिसके चलते दो साल में ही ट्रॉमा सेंटर के निर्माण की हकीकत सामने आ रही है। शासन स्तर पर करोड़ों रुपयों की राशि जारी करने के बाद भी जमीनी स्तर पर ठेकेदार मनमानी से काम कर रहे हैं जिसके चलते ऐसी स्थिति निर्मित होना शुरू हो गई है। ट्रॉमा सेंटर में व्यवस्थित रूप से सुधार और मरम्मत की जरूरत है। आईसीयू कक्ष के बाहर तो गंभीरता से मरम्मत कराई जाना चाहिए। लेकिन इस ओर अभी तक प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।

अधिकारियों से ली जाएगी रिपोर्ट, की जाएगी जांच

सीएमएचओ डा. वर्षा राय का कहना है कि ट्रॉमा सेंटर में बने कक्षों में क्या समस्या आ रही है। इसकी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों से ली जाएगी। रिपोर्ट के बाद गंभीरता से संबंधित ठेकेदार के माध्यम से क्षतिग्रस्त जगह को ठीक कराया जाएगा। इसकी प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाएगी। यदि निर्माण में कहीं गड़बड़ी हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी।