Naidunia
    Sunday, December 17, 2017
    PreviousNext

    रेपिस्ट के बच्चे को जन्म देने के लिए पीड़िता बाध्य नहीं : HC

    Published: Thu, 07 Dec 2017 11:39 PM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 10:09 AM (IST)
    By: Editorial Team
    court jbl 07 12 2017

    जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी रेप पीड़िता को रेपिस्ट के बच्चे को जन्म देने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। इस तरह के मामलों में यह निर्देश नजीर बन जाएगा। हाईकोर्ट ने यह आदेश एक नाबालिग रेप पीड़िता के 16 हफ्ते के भ्रूण के गर्भपात के संबंध में दिया।

    हालांकि रेप पीड़िता की याचिका की अर्जेंसी समझते हुए सरकार को 24 घंटे के भीतर 3 रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर डॉक्टर्स की कमेटी गठित करने का निर्देश भी दिया। यह कमेटी 24 घंटे के भीतर दुराचार पीड़ित गर्भवती की जांच करके अपनी रिपोर्ट देगी। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि 3 में से 2 डॉक्टर्स की राय गर्भपात के पक्ष में आएगी तो गर्भपात की प्रक्रिया अविलंब पूर्ण की जाए।

    सरकार उठाए इलाज का पूरा खर्च

    हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजय पॉल की एकलपीठ ने आदेश में साफ किया कि दुराचार की शिकार नाबालिग गर्भवती के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाए। इस निर्देश का पालन प्रारंभिक जांच से लेकर गर्भपात किए जाने और उसके बाद तक की प्रक्रिया में किया जाएगा।

    अर्जेंसी को समझते हुए समय का पालन करें

    मेडिकल साइंस के मुताबिक यदि गर्भ 20 सप्ताह की समयसीमा पूर्ण कर ले, तो गर्भपात से गर्भवती की जान को खतरा हो सकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अर्जेंसी शब्द पर विशेष जोर दिया।

    स्वास्थ्य व महिला बाल विकास करे निगरानी

    राज्य के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और महिला बाल विकास व्यक्तिगत तौर पर निगरानी करें। उपमहाधिवक्ता पुष्पेन्द्र यादव को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे आदेश का अविलंब अक्षरश: पालन सुनिश्चित कराएं।

    भ्रूण का डीएनए सैंपल रखें सुरक्षित

    यदि नाबालिग रेप पीड़िता का गर्भपात कराया जाता है तो भ्रूण का डीएनए सेम्पल सीलबंद कवर में सुरक्षित रखा जाए।


    क्या है मामला

    खंडवा निवासी एक किसान ने 15 अक्टूबर को अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने बेटी को बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। 31 अक्टूबर को याचिकाकर्ता को बेटी मिली। मेडिकल जांच में बेटी के गर्भवती होने का पता चला। नियमों का हवाला देकर डॉक्टरों ने गर्भपात से इनकार कर दिया। इसके बाद किसान ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई।

    उसका कहना था कि नाबालिग की उम्र बच्चे को जन्म देने लायक नहीं है। बच्चे के जन्म के बाद उसकी शादी में भी परेशानी आएगी। बच्ची का भविष्य व सामाजिक जीवन नष्ट हो जाएगा। हाईकोर्ट ने बुधवार को बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था, जो गुरुवार को सुनाया गया। याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता पराग एस चतुर्वेदी के साथ जगदीश साकले और अनिल यादव ने रखा।

    मुआवजे के लिए अलग से लगा सकते हैं केस

    हाईकोर्ट ने साफ किया कि याचिकाकर्ता के वकीलों ने मुआवजे के संबंध में फिलहाल कोई जोर नहीं दिया था। लिहाजा, यदि याचिकाकर्ता चाहे तो अलग से समुचित फोरम की शरण लेकर मुआवजे की मांग करने स्वतंत्र है।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें