भोपाल। आदिवासी समुदाय को एकल विवाह के लिए सरकारी सहायता देने का वचन राज्य सरकार पूरा नहीं कर पाएगी। कांग्रेस के इस वादे में पेंच आ गया है। सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग ने ऐसा करने में तमाम तरह की दिक्कतें बताते हुए सरकार को ऐसा करने से रोक दिया है।

अफसरों ने साफ कह दिया है कि इस वादे को पूरा किया, तो विभाग का पूरा बजट एक ही योजना पर खर्च हो जाएगा। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने जनता से मुख्यमंत्री कन्यादान-निकाह योजना की राशि बढ़ाने का वादा किया था।

साथ ही आदिवासी समुदाय को एकल (घर से किए जाने वाले विवाह) विवाह के लिए सहायता की भी घोषणा की थी। पार्टी ने यह घोषणाएं अपने वचन पत्र में भी शामिल की थीं। सरकार बनते ही योजना की राशि में इजाफा कर दिया गया और सरकार ने एकल विवाह के लिए राशि देने के भी निर्देश जारी कर दिए थे, लेकिन अफसरों की समझाइश के बाद यह फैसला वापस ले लिया गया। पिछले दिनों विभाग ने इसके आदेश भी जारी कर दिए हैं।

एकल विवाह के लिए सरकारी मदद देने के मामले में विभाग के अफसरों का अलग ही तर्क है। अफसरों का कहना है कि ऐसा करना बड़ी समस्या खड़ी कर देगा। विभाग का पूरा बजट इसी योजना पर खर्च हो जाएगा। वे कहते हैं कि हर व्यक्ति अपनी बेटी की घर से शादी करेगा और उसके लिए सरकार से राशि मांगेगा। इसके चलते योजना में फर्जीवाड़ा होने की भी आशंका रहेगी।

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत राज्य सरकार सामूहिक विवाह कार्यक्रम में युवती का विवाह करने वाले परिवार को 51 हजार रुपए की सहायता दे रही है। पिछली सरकार ऐसे परिवारों को 25 हजार रुपए सहायता दे रही थी।