- जीएम, डीआरएम और स्टेशन इम्प्रूवमेंट ग्रुप के अधिकारियों के दौरे भी बेअसर

- गंदे पानी की निकासी नहीं होने से स्टेशन परिसर में बढ़ा मच्छरों का प्रकोप, यात्री परेशान

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

मेंटेनेंस के लिए करोड़ों रुपए का बजट और एक साल में 50 से ज्यादा निरीक्षण के बाद भी अधिकारी भोपाल रेलवे स्टेशन का चोक अंडर ग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम ठीक नहीं करा सके। यह सिस्टम बीते छह महीने से चोक है। नालियों से गंदे पानी की निकासी नहीं होती, मच्छर पनपते हैं। गंदगी के कारण चूहे, कॉकरोच पनप रहे हैं। आम यात्रियों को इनका शिकार होना पड़ रहा है। यह स्थिति तब है जब स्वच्छता में स्टेशन पिछड़ चुका है और इसी महीने फिर से सर्वे होना है। अब तक हुए निरीक्षण जबलपुर जोन के जीएम गिरीश पिल्लई, डीआरएम शोभन चौधुरी और स्टेशन इम्प्रूवमेंट ग्रुप (एसआईजी) में शामिल अधिकारियों ने किए।

बता दें कि भोपाल रेलवे स्टेशन का अंडर ग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम चोक है। इसके कारण प्लेटफार्म-2 व 6 के बीना छोर और प्लेटफार्म-1 के इटारसी छोर के चैंबर छह महीने से बंद पड़े हैं। यह बात 30 दिसंबर 2017 को एसआईजी के निरीक्षण में भी सामने आ चुकी है। इसी बीच प्लेटफार्म-1 के प्रथम तल पर बने शौचालयों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी वाली लाइन भी लीकेज हुई थी। इस कारण प्लेटफार्म-1 पर बने कैबिनों को खाली करना पड़ा था। इसके बाद भी अंडर ग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम को ठीक नहीं किया गया। अब यह स्थिति है कि स्टेशन परिसर में बनी नालियों से गंदे पानी की निकासी नहीं हो पा रही है।

- ठेकेदार को नहीं किया ब्लैक लिस्ट

स्टेशन परिसर में अंडर ग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम की निगरानी व रिपेयरिंग का काम नौशाद नामक ठेकेदार को दिया था। सूत्रों के मुताबिक बार-बार ड्रेनेज सिस्टम चोक होने के कारण ठेकेदार के बिल रोक दिए। उसने काम भी बंद कर दिया, लेकिन अधिकारियों ने उसे ब्लैक लिस्ट नहीं किया।

- सर्वे में सामने आ चुका है सच

स्टेशन परिसर से गंदे पानी की ठीक से निकासी नहीं होती। यह बात 23 मार्च 2017 को क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के सर्वे में सामने आ चुकी है। एक साल का समय मिलने के बाद भी अधिकारी उन समस्याओं को पूरी तरह नहीं सुलझा सके, जिनकी वजह से स्टेशन की छवि खराब हुई थी।

- इनसाइड स्टोरी : डीआरएम गंभीर, पर ब्रांच प्रमुखों में समन्वय की कमी

भोपाल स्टेशन के कायाकल्प के लिए डीआरएम शोभन चौधुरी तो गंभीर हैं। वे रात में औचक निरीक्षण कर चुके हैं। ऐसा करने वाले वे मंडल के पहले डीआरएम बन चुके हैं। लेकिन कुछ ब्रांच प्रमुख गंभीर नहीं हैं। इसका नतीजा शौचालयों से दरवाजे गायब रहना। नालियों का स्लोप ठीक नहीं होना। करोड़ों रुपए खर्च कर लगाई लिफ्ट का बार-बार बंद होना और सर्कुलेशन एरिए में अवैध पार्किंग होना है। सूत्र बताते हैं कि भोपाल स्टेशन पर कमियों के लिए कुछ अधिकारी एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यहां तक की कुछ अधिकारी पुराने कामों के मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं देते, लेकिन नया काम स्वीकृत कराने में उनकी रुचि रहती है।

- नए सिरे से स्टेशन के कायाकल्प का दावा

अब रेलवे अधिकारियों का दावा है कि स्टेशन का नए सिरे से कायाकल्प होगा। यानी कई सारे काम होंगे। भोपाल रेल मंडल के प्रवक्ता आईए सिद्दीकी कह चुके हैं कि यात्री सुविधाओं से जुड़े काम कराए जाएंगे। कुछ कामों के टेंडर फाइनल हो चुके हैं। रेलवे बोर्ड इसकी मॉनीटरिंग कर रहा है। ये काम दिसंबर 2018 तक दिखने लगेंगे।