उज्जैन। अक्षय तृतीया पर मंगलवार को धर्मधानी में चहुंओर उल्लास छाएगा। अबूझ मुहूर्त में शहनाई की गूंज सुनाई देगी। रोहिणी नक्षत्र व उच्च के चंद्रमा की शुभ साक्षी में खरीदारी करना स्थायी समृद्धि प्रदान करेगी। वैष्णव मंदिरों में भगवान की दिनचर्या बदलेगी।

ज्योतिषियों के अनुसार अक्षय तृतीया पर दिए गए दान का पुण्य कभी क्षय नहीं होता है। इस दिन जल से भरे घट का दान करने से पितृ प्रसन्न् होते हैं।

ज्योतिर्विद पं.आनंदशंकर व्यास के अनुसार अक्षय तृतीया को जया तिथि कहा गया है। अर्थात यह विजय श्री दिलाने वाली मानी गई है। इस बार आखातीज पर श्रवण नक्षत्र व उच्च के चंद्रमा का होना विशेष शुभ है। इस विशिष्ट योग में की गई सोने, चांदी, भूमि, भवन, वाहन, पात्र, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद आदि की खरीदी स्थायी संपत्ति बन जाती है।

सालों बाद अक्षय तृतीया पर कीमती धातु सोना, चांदी आदि के भाव में गिरावट दर्ज की गई है। इससे लोगों का रुझान आभूषणों की खरीदी की ओर बढ़ा है। मंगलवार को सराफा बाजार में तेजी का रुख रहने की उम्मीद व्यापारी जता रहे हैं। पं.व्यास के अनुसार आखातीज पर जल से भरे मिट्टी के कलश पर फल व द्रव्य रखकर ब्राह्मण को दान करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है।

इन मंदिरों में बदलेगी भगवान की दिनचर्या

शहर के पुष्टिमार्गीय वैष्णव मंदिर, इस्कॉन, सांदीपनि आश्रम व गोपाल मंदिर में भगवान की दिनचर्या बदलेगी। ठाकुरजी को सूती वस्त्रों की पोशाक धारण कराई जाएगी। श्रंगार व पूजन में मोगरे के फूल चढ़ेंगे। मस्तक पर चंदन व शीतल सामग्री का भोग लगाया जाएगा। सांदीपनि आश्रम में मंदिर का ध्वज भी बदला जाएगा।