उज्जैन (राजेश वर्मा)। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर 6 अप्रैल से वासंती नवरात्र का आरंभ होगा। शक्ति की उपासना का पर्वकाल इस बार श्रेष्ठ योगों से लब्ध रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार 9 दिवसीय नवरात्र में 5 बार सर्वार्थसिद्धि, दो बार रवियोग तथा एक बार रवि पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। साधाना व सिद्धि के साथ यह दिन नौ दिन देवी कृषा से धन प्राप्ति के उपाय करने के लिए भी श्रेष्ठ बताए जा रहे हैं।

ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्रि शनिवार के दिन रेवती नक्षत्र के साथ आरंभ हो रही है। उदय काल में रेवती नक्षत्र का योग साधना व सिद्धि में पांच गुना अधिक शुभफल प्रदान करेगा। नौ दिवसीय पर्वकाल में पांच बार सर्वार्थसिद्धि तथा दो बार रवियोग का होना धर्म शास्त्री की दृष्टि से श्रेष्ठ है। श्रीमद् देवी भागवत के अनुसार ऐसे योगों में देवी साधना का विशेष फल प्राप्त होता है। धन तथा धर्म की वृद्धि करने वाली यह नवरात्रि इस बार खास है।

सर्वार्थसिद्धि व रवियोग कब-कब

7 अप्रैल रविवार द्वितीया तिथि सर्वार्थसिद्धि योग

8 अप्रैल सोमवार तृतीया तिथि रवियोग (गणगौर तीज)

9 अप्रैल मंगलवार चतुर्थी तिथि सर्वार्थसिद्धि योग

10 अप्रैल बुधवार पंचमी तिथि सर्वार्थसिद्धि योग (लक्ष्मी पंचमी)

11 अप्रैल गुरुवार षष्ठी तिथि रवियोग

12 अप्रैल शुक्रवार सप्तमी तिथि सर्वार्थसिद्धि योग

13 अप्रैल शनिवार महाअष्टमी (सुबह 11.42 के बाद नवमी तिथि स्मार्त मतानुसार)

14 अप्रैल रविवार महानवमी रवीपुष्य नक्षत्र व सर्वार्थसिद्धि योग (सुबह 9.37 बजे तक नवमी वैष्णव मतानुसार)

रेवती नक्षत्र क्यों है खास

पं. डब्बावाला ने बताया रेवती नक्षत्र पंचक का पांचवा नक्षत्र है। इस नक्षत्र का शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से 1 घंटे तक स्पर्श होना, वह भी उदयकाल से करीब 45 मिनट तक रहना तंत्र साधना की दृष्टि से सर्वोत्तम है। नक्षत्र सिंद्धात की दृष्टि से देखें तो रेवती नक्षत्र का स्वामी पुषा है, जो ऋ ग्वेद के अन्य देवताओं में से एक है। इस लिए यह नवरात्रि यंत्र, तंत्र व मंत्र सिद्धि के लिए विशेष मानी जा रही है। इसमें धन प्राप्ति के लिए किए जाने वाले उपाय भी कारगर होंगे।