उज्जैन। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रदोष पर मंगलवार को वारुणी योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार भौम प्रदोष पर वारुणी योग में भगवान मंगलनाथ या अंगारेश्वर का पूजन करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। विभिन्न राशि के जातक अपनी राशि अनुसार वस्तु भगवान को अर्पित करें, तो सफलता व समृद्धि की प्राप्ति होती है।

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया पंचागीय गणना के अनुसार 2 अप्रैल को मंगलवार के दिन शत तारका नक्षत्र, शुभयोग, तैतिल के उपरांत वाणिज करण एवं कुंभ राशि के चंद्रमा की साक्षी में प्रदोष आ रही है। पंचाग की यह स्थिति वारुणी योग का निर्माण कर रही है। इस योग में तीर्थ स्नान, जप, साधना तथा अनुष्ठान का विशेष महत्व है। मंगलवार का दिन प्रदोष तिथि लेकर आया है, इसलिए यह भौम प्रदोष कहलाएगा। इस दिन शत तारका नक्षत्र का होना सौ प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाता है।

जिन जातकों की जन्म पत्रिका में मंगल दोष हों अथवा जो भक्त महामंगल की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं। वें इस दिन मंगलनाथ व अंगारेश्वर महादेव मंदिर में अपनी राशि अनुसार पूजन सामग्री अर्पित कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। वर्ष में किए गए ज्ञात अज्ञात दोषों की निवृत्ति के लिए भी भौम प्रदोष पर वारुणी योग में तीर्थ पर दान पुण्य करने से अनुकूलता प्राप्त होती है।

शुभ योग की साक्षी खास

भौम प्रदोष पर शुभ योग की साक्षी विशेष मानी गई है। 27 योगों में 23 वे स्थान पर आने वाले शुभ योग की अधिष्ठात्री देवी माता महालक्ष्मी है। विशिष्ट तिथि व योग के संयोग में शुभ योग का होना आर्थिक प्रगति तथा भूमि, भवन, वाहन आदि की प्राप्ति के लिए खास माना गया है।

राशि अनुसार वस्तुएं अपर्ति करें

-मेष : अनार, गेहूं व लाल वस्त्र

-वृषभ : घी से भरे पात्र को भगवान से स्पर्श करा कर ब्राह्मण को दान करें।

-मिथुन : गन्ने के रस से भगवान का अभिषेक करें।

-कर्क : दूध या पंचामृत से अभिषेक करें।

-सिंह : नारियल के पानी से अभिषेक करें।

-कन्या : पंचामृत से अभिषेक करें।

-तुला : सात प्रकार के धान अर्पित करें।

-वृश्चिक : विभिन्न प्रकार के फल भगवान को स्पर्श करा कर ब्राह्मण को दान दें।

-धनु : खसखस मिश्रित पीला चंदन भगवान को अर्पित करें।

-मकर : कांसे के बर्तन में सफेद तिल्ली रखकर भगवान को स्पर्श कराकर दान दें।

-कुंभ : धान्य मिश्रित जल से भगवान का अभिषेक करें।

-मीन : पीले व लाल पुष्प के साथ ऋतुफल भगवान को चढ़ाएं।