उज्जैन। शनैश्चरी अमावस्या के नहान पर किरकिरी होने के बाद मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार ने श्रद्धालुओं को मकर संक्रांति (15 जनवरी) का स्नान नर्मदा के जल से कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। पिछली घटना से सबक लेकर वक्त न गंवाते हुए स्थानीय नगर निगम ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) को पानी का मांग पत्र भेज दिया है। वहीं पत्र मिलते ही एनवीडीए ने नर्मदा के जल से शिप्रा बैराज भरने को अपने चारों पंप हाउस चालू कर दिए।

शिप्रा नदी पर बने सभी 20 बेराज के गेट भी खोल दिए। अमावस्या पर नहान के लिए नर्मदा का पानी उज्जैन न आने से श्रद्धालु नाराज हुए थे। इसका असर यह हुआ कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने घटना की जांच बैठाई और रिपोर्ट आती, उसके पहले ही जिम्मेदार संभागायुक्त एमबी ओझा और कलेक्टर मनीष सिंह का तबादला कर दिया। इस कार्रवाई से पूरे प्रदेश में यह मैसेज गया कि कांग्रेस की सरकार जरा भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।

भविष्य में धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ न हो, इस चेतावनी के बाद उज्जैन प्रशासन और एनवीडीए हरकत में आया। नगर निगम आयुक्त प्रतिभा पाल के निर्देश पर पीएचई के कार्यपालन यंत्री धर्मेंद्र वर्मा ने एनवीडीए को पत्र भेजा। पत्र के माध्यम से मकर संक्रांति स्नान के लिए नर्मदा का साढ़े 4 एमसीएम पानी मांगा गया। पत्र मिलते ही एनवीडीए ने शिप्रा बैराज भरने को अपने चारों पंप हाउस चालू कर दिए और सोमवार को संगम स्थल इंदौर के गांव उज्जयिनी से लेकर उज्जैन तक शिप्रा नदी पर बने सभी 20 बैराज के गेट खोल दिए।

एनवीडीए ने कहा है कि मकर संक्रांति का स्नान इस बार भी नर्मदा-शिप्रा के संगम जल में होगा। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है।

पांच बार ओवरफ्लो हुई थी शिप्रा

अच्छी बारिश होने से गत वर्ष शिप्रा नदी पांच मर्तबा ओवरफ्लो हुई थी। नवंबर 2018 तक शिप्रा के सभी बेराज भरे थे, मगर धीरे-धीरे वे सूखते चले गए। कारण किसानों द्वारा नदी का पानी खेतों की सिंचाई में इस्तेमाल कर लिया जाना रहा।

हैरानी की बात यह है कि प्रशासनिक प्रतिबंध के बावजूद नदी का पानी किसानों ने लिया। नवंबर-2018 में कलेक्टर ने शिप्रा और गंभीर नदी का पानी संरक्षित घोषित कर दिया था। बावजूद पानी चोरी होने पर न किसानों के खिलाफ कार्रवाई हुई ना ही जिम्मेदार राजस्व, जल संसाधन और पीएचई विभाग के अफसरों पर कार्रवाई हुई।