उज्जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, नरसिंहा राव और अटलबिहारी वाजपेयी के वैज्ञानिक सलाहकार रहे प्रो. ओमप्रकाश पांडेय मंगलवार को उज्जैन में थे। उन्होंने विक्रम यूनिवर्सिटी के मंच से यज्ञ की ताकत बताई। कहा कि पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त करने का सर्वश्रेष्ठ उपाय है यज्ञ। एक यज्ञ करने से 100 गज क्षेत्र का आवरण सप्ताहभर तक प्रदूषण मुक्त रहता है। प्रो. ओमप्रकाश यूनिवर्सिटी के स्वर्ण जयंती हॉल में 'वैश्विक तापमान एवं पर्यावरण संरक्षण' विषय पर बतौर अतिथि वक्ता संबोधित कर रहे थे।

पर्यावरण को किसी प्रकार नुकसान पहुंच रहा है और इस नुकसान को कैसे कम किया जा सकता है, इसके उपाय उन्होंने बताए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पढ़ाना बंद, सीखाना शुरू करें। पढ़ाने से विद्यार्थी तोते की तरह रटनपट्टू हो गए हैं। जिसका नतीजा है कि वह मां के हाथ बनी रोटी को छोड़ मैदे को सड़ाकर बनाए पिज्जा को पसंद करने लगे हैं। पेड़ काट रहे हैं। दीपक की बजाय अगरबत्ती जला रहे हैं। वो जानते ही नहीं जिस बांस की सलाई से अगरबत्ती बनती है, उसे जलाने से जो धुंआ निकलता वह 100 सिरगेट पीने के बराबर हानिकारक है।

वेद-शास्त्रों में भी कहीं अगरबत्ती जलाने का जिक्र नहीं है। बांस को विवाह आदि शुभ कार्यों में पूजन में इस्तेमाल किया जाता है। जलाया नहीं जाता। पर्यावरण पर ध्यान न देने की वजह से सुनामी जैसी घटनाएं बढ़ रही है। ओजोन लेयर में छिद्र हो गया है, जिसके कारण इबोला, स्वाइन फ्लू, जीका जैसे वायरस मानव प्रजाति को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसएस पांडे से कहा कि एक फेक्ल्टी भले कम रखें, पर कम से कम तीन बरगद के पेड़ वे अवश्य कैंपस में लगवाएं। स्वागत कुलसचिव डॉ. डीके बग्गा और संचालन कुलानुशासक डॉ. शैलेंद्र शर्मा ने किया।

यह भी बोले

- बीजिंग के बाद बेंगलुरू में ताजा हवा डिब्बे में बिक रही है, जल्द पूरे देश में बिकेगी।

- केला, बादाम, गाय का दूध, नारियल पानी पीएंगे तो दिमाग तेज चलेगा। याद करने की शक्ति बढ़ेगी।

- एक आंवले में 500 सेब के बराबर न्यूट्रीशियन है, इसलिए रोज एक आंवले का सेवन करें। त्वचा, बाल, आंखें स्वस्थ रहेंगी।

- ट्रैक्टर से खेत जोतने की बजाय बैल से खेत जोतना लाभकारी है। पहले बैल से खेत जोतते थे तो 27 क्विंटल प्रति हैक्टेयर उत्पादन होता था। अब टैक्टर की वजह से 5 से 7 क्विंटल प्रति हैक्टयर रह गया है।

- नमक में आयोडिन के रूप में जो केमिकल डालते हैं वही केमिकल सीमेंट को मजबूत बनाने के लिए उपयोग होता है। आयोडिन की जरूरत हर शरीर के हिसाब से अलग है, मगर मार्केटिंग के लिए कंपनियों ने सबको आयोडिन खिलाना शुरू कर दिया।