भोपाल/ उज्‍जैन। साल के पहले पर्व स्नान पर महाकाल की नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी में नर्मदा जल न पहुंचने और अव्यवस्था की गाज कमिश्नर एमबी ओझा और कलेक्टर मनीष सिंह पर गिरी। सोमवार को सरकार ने दोनों को हटाते हुए अजीत कुमार को कमिश्नर और शशांक मिश्रा को कलेक्टर बनाया है।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव एसआर मोहंती से रिपोर्ट तलब की थी। बताया जा रहा है कि कलेक्टर मनीष सिंह ने मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा और सुरेंद्र सिंह बघेल का फोन भी नहीं उठाया था। इसकी शिकायत रविवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भी उठी थी।

शनिवार को साल 2019 के पहले पर्व स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे थे। शिप्रा नदी में नर्मदा जल न पहुंचने पर स्नान करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। नल के पानी से जैसे-तैसे स्नान करके श्रद्धालुओं ने काम चलाया। इसको लेकर कांग्रेस सरकार की जमकर आलोचना भी हुई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को जांच के आदेश देकर रिपोर्ट मांगी। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में कमिश्नर और कलेक्टर की लापरवाही की बात सामने आई, क्योंकि इन्होंने पहले से पुख्ता इंतजाम नहीं किए। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने भी इस बात की पुष्टि की कि सिर्फ दो दिन पहले पानी मांगा गया, यदि औेर पहले मांग आती तो पानी जरूर दिया जाता।

वहीं, दो मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा और सुरेंद्र सिंह बघेल ने इस मामले को लेकर कलेक्टर को फोन भी लगाया था, लेकिन उन्होंने नहीं उठाया। रविवार को हुई विधायक दल की बैठक में दोनों मंत्रियों ने यह मुद्दा भी उठाया था। कराड़ा ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि हमने मुख्यमंत्री से इसकी शिकायत भी की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने सोमवार को कमिश्नर और कलेक्टर को पद से हटा दिया।

18वें दिन फिर मिली कलेक्टरी

2007 बैच के आईएएस अफसर शशांक मिश्रा को 18वें दिन ही फिर कलेक्टरी मिल गई। 21 दिसंबर 2018 को उन्हें बैतूल कलेक्टर पद से हटाकर मंत्रालय में उप सचिव बनाया गया था।

शाम को नए कलेक्टर ने लिया पदभार

आदेश जारी होने के चंद घंटों बाद ही नए कलेक्टर शशांक मिश्रा ने पदभार ग्रहण कर लिया। वे परिवार सहित महाकाल मंदिर पहुंचे और फिर कार्यालय गए। रात को उन्होंने अधिकारियों की बैठक ली।