धीरज गोमे, उज्जैन। विक्रम विश्वविद्यालय से सत्र 2016-18 के बीच एमबीए किए विद्यार्थियों को नौकरी नहीं मिल पा रही है। मुख्य कारण च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के तहत विद्यार्थियों को स्पेशलाइजेशन नहीं कराना है। उनसे किसी विषय में न प्रोजेक्ट तैयार कराया गया है और ना ही उनका वायवा लिया गया है। स्थिति यह है कि अब वे जब प्राइवेट सेक्टर में नौकरी मांगने जा रहे तो नियोक्ता उनसे स्पेशलाइजेशन मांग रहे हैं। विद्यार्थी कोर होना बताते हैं, जिसे नियोक्ता मान्य नहीं कर रहे।

मध्यप्रदेश शासन के ई-गवर्नेंस सोसायटी में प्रबंधक, सहायक प्रबंधक की वैकेंसी में भी स्पेशलाइजेशन मांगे जाने से वे आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। स्थिति पर एमबीए डिपार्टमेंट के डायरेक्टर ने कहा है कि जो नहीं हुआ अब कराएंगे। प्रस्ताव आगामी बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में रखा जाएगा। मालूम हो कि बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में वर्ष 2016 में शुरू हुई एमबीए की बैंच के लिए सीबीसीएस मॉडल लागू करने का फैसला लिया था। इस मॉडल का शुरूआत में कई कॉलेजों ने विरोध किया था।

विरोध स्वरूप कईयों ने ये मॉडल नहीं अपनाया। विश्वविद्यालय के एमबीए डिपार्टमेंट ने यह मॉडल अपनाया, जिसके तहत चारों सेमेस्टर की पढ़ाई बिना किसी विषय में स्पेशलाइजेशन कराए, डेजर्टेशन कराए, वायवा लिए कराई गई। स्थिति यह है कि अब ये विद्यार्थी फिल्ड में नौकरी मांगने जा रहे तो नियोक्ता उनसे पूछ रहे हैं कि आखिर किस विषय में स्पेशलाइजेशन किया है। जवाब कोर कहते तो वे मान्य नहीं करते। स्पेशनलाइजेशन न होने से वे गवर्नमेंट जॉब के लिए भी अप्लाई नहीं कर पा रहे।

मामले में विद्यार्थियों ने कहा है कि जब सिलेबस में ही स्पेशलाइजेशन नहीं था तो क्या करे। जब एडमिशन लिया था तब था। फर्स्ट सेमेटर का परिणाम ग्रेडिंग सिस्टम पर आया था मगर बाद के सेमेस्टर के परिणाम परसेंटेज आधार पर आए। यदि सुधार नहीं हुआ तो हमारी डिग्री किसी काम की नहीं रहेगी।

इन विषयों में होता है स्पेशलाइजेशन

एचआर, मार्केटिंग, सिक्यूरिटी, आईटी, सिस्टम्स। ये पांच वो प्रमुख विषय हैं जिनमें सामान्यत: पिछली बैच के विद्यार्थी स्पेशलाइजेशन किया करते थे। ये एक तरह का प्रबंध के लिए प्रायोगिक ज्ञान होता था, जिसके आधार पर ही जॉब मिलती थी।

सीबीसीएस मॉडल में किसी विषय में स्पेशलाइजेशन नहीं होता। अभी जो बैच निकला है उनको वायवा या प्रोजेक्ट नहीं कराया, जबकि होना चाहिए था। अब इसे लागू करेंगे। इसका प्रस्ताव बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में रखेंगे। पहले स्पेशलाइजेशन का प्रावधान क्यों नहीं रखा, इसके बारे में विश्वविद्यालय प्रशासन से पूछना बेहतर होगा। -डीडी बेदिया, डायरेक्टर, एमबीए डिपार्टमेंट, विक्रम विश्वविद्यालय