उज्जैन। इंदौर रोड पर नियम विरुद्घ बनी होटल शांति क्लार्क इन सुइट्स की इमारत तोड़ने को नगर निगम ने बुधवार को होटल मालिक चंद्रशेखर श्रीवास को नोटिस भेजा। कहा कि 5 दिन में अपना होटल हटा लें वरना निगम तोड़ेगा और तुड़ाई का सारा खर्चा वसूलेगा।

एक जनहित याचिका पर मंगलवार को इंदौर हाईकोर्ट ने मंगलवार को होटल की समस्त परमिशन रद्द कर 7 हजार वर्ग फीट में बने होटल शांति क्लार्क को तोड़ने के निर्देश डीजीपी इकनॉमिक अफेंस और नगर निगम आयुक्त को दिए। साथ ही डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को आदेश दिया कि वे धोखाधड़ी करने वाले होटल मालिक समेत समस्त जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच कर केस दर्ज कराएं। आदेश के पालन में नगर निगम आयुक्त प्रतिभा पाल ने होटल मालिक को पांच दिन में यानी 24 मई तक होटल खाली कर स्वयं के खर्च पर तोड़ने को नोटिस दिया। कहा कि अगर स्वयं ने होटल नहीं तोड़ा तो नगर निगम पांच दिन बाद तोड़ेगी और तुड़ाई का सारा खर्च आपसे वसूलेगी।

इसलिए तोड़ा जाएगा होटल, क्योंकि..

- गृह निर्माण सोसायटियों की आवासीय जमीन पर व्यवसायिक होटल ताना गया था।

- भूमि डायवर्शन से पहले ही नगर निगम ने भवन निर्माण अनुज्ञा जारी कर दी थी।

होटल प्रेसीडेंट तोड़ने को दिया था घंटेभर का वक्त, शांति क्लार्क को ज्यादा रियायत

डेढ़ साल पहले 27 अक्टूबर 2017 को नगर निगम ने हरिफाटक क्षेत्र में स्थित होटल प्रेसीडेंट को ढहाया था। तब होटल खाली करने के लिए तत्कालीन नगर निगम आयुष आशीष सिंह ने होटल मालिक को सिर्फ 1 घंटे की मोहलत दी थी। तड़के ही निगम के अधिकारी दल-बल के साथ होटल पहुंच गए थे। उन्होंने होटल में ठहरे लोगों को बाहर किया और तुड़ाई शुरू की। तब होटल तोड़ने की वजह होटल संचालक पूर्व पार्षद गुड्डू कलीम द्वारा नगर निगम से अनुमति लिए बिना ही वर्ष 2014 में होटल का निर्माण कर लिया जाना थी। होटल का बिल्डअप एरिया 22 हजार वर्ग फीट था, जिसकी कीमत 5 करोड़ रुपए थी। इसे तोड़ने पर नगर निगम के 25 लाख रुपए खर्च हुए थे।

मिलीभगत में इनका अहम रोल

होटल शांति क्लार्क निर्माण के लिए भूमि डावर्शन एवं विकास की अनुमति देने वाले तत्कालीन एसडीएम, आवासीय प्लॉट की व्यावसायिक उपयोग के लिए प्लॉट की रजिस्ट्री करने वाले फर्म एंड सोसायटी के उपपंजीयक समेत बिल्डिंग परमिशन जारी करने वाले नगर निगम के तीन इंजीनियरों का महत्वपूर्ण रोल रहा है। ऐसे में उम्मीद है कि इन अफसरों को प्रथम दृष्टया निलंबित कर इनके खिलाफ धोधाखड़ी का केस दर्ज होगा।

वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

होटल शांति क्लार्क इन सुइट्स का निर्माण सिंहस्थ-2016 से पहले हुआ था। इसके निर्माण के लिए नगर निगम ने भवन अनुज्ञा साल 2013 में जारी की थी। एक शिकायत के बाद लोकायुक्त, नगर निगम और सहकारिता विभाग ने नियम विरुद्घ जमीन खरीदने और भवन अनुज्ञा प्राप्त करने की जांच की गई। साल 2017 में खरीदी जमीन का सौदा निरस्त कर दिया गया था। तत्कालीन नगर निगम आयुक्त ने भवन अनुज्ञा जारी करने वाले कार्यपालन यंत्री रामबाबू शर्मा, सहायक यंत्री जीके जायसवाल और उपयंत्री श्याम शर्मा के खिलाफ नानाखेड़ा थाने में एफआईआर भी करवाई थी। हालांकि बाद में लोकायुक्त द्वारा केस समाप्त कर दिए जाने से एफआईआर भी थाने से कटवा दी गई।