उज्जैन। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर छाए ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर परिसर में एक मॉडल के वीडियो ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यूं तो मंदिर परिक्षेत्र में मोबाइल और कैमरा प्रतिबंध है, लेकिन इस व्यवस्था का कभी पालन हुआ ही नहीं। उधर, मंदिर में श्रद्धालुओं का सामान सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त लॉकर व्यवस्था तक नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार सामान्य दिनों में हर घंटे महाकाल दर्शन को 1200 से 1500 श्रद्धालु आते हैं, जिनके अनुपात में लॉकर सिर्फ 700 ही हैं। इनमें भी 150 लॉकर वीआईपी के लिए आरक्षित हैं।

मालूम हो कि 3 सितंबर को तड़के भस्मारती दर्शन करने आई मुंबई की मॉडल नंदनी कुरील ने मंदिर परिसर में पोज देते फोटो और वीडियो बनवाए थे। ये फोटो-वीडियो उन्होंने सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर शेयर किए तो श्रद्धालुओं ने नाराजगी जताई। इसकी काफी निंदा हुई और मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और गरिमा पर सवाल खड़े हुए।

वैसे मामले में महाकाल मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष और कलेक्टर मनीष सिंह ने मॉडल को नोटिस जारी कर दिया है मगर सुरक्षा में कसावट को लेकर कोई फेरबदल नहीं किया है। बदइंतजामी पर सबसे प्रमुख सवाल यह है कि करोड़ों रुपए में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए हायर की गई सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारियों, पंडे-पुजारियों एवं अधिकारियों के रहते वीडियो बन कैसे गया। किसी ने रोका क्यों नहीं। दूसरा सवाल लॉकर सुविधा को लेकर उठा। नईदुनिया ने शनिवार को मंदिर की लॉकर व्यवस्था को टटोला तो पता चला कि हर घंटे यहां जितने श्रद्धालु पर्स, मोबाइल, बैग आदि सामान लेकर आते हैं, उतने अनुपात में यहां लॉकर सुविधा उपलब्ध ही नहीं है।

हार-फूल, प्रसाद बेचने वालों ने बना रखे लॉकर, आईबी ले चुकी आपत्ति

मंदिर प्रबंध समिति के लॉकर की संख्या कम होने और श्रद्धालुओं की परेशानी को ध्यान में रखकर मंदिर के बाहर खुली हार-फूल, प्रसाद की दुकान के संचालकों ने अपनी दुकान में लॉकर बना रखे हैं। यहां करीब 30 दुकानें मंदिर प्रबंध समिति की हैं और इतनी ही माधव सेवा न्यास की। इन 60 दुकानों में करीब 800 लॉकर हैं, जिन्हें इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित नहीं माना है। बावजूद इन लॉकरों को हटाने या उन्हें सुरक्षित कराने को मंदिर प्रबंध समिति की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है।