-उज्जैन ग्लोबल रिट्रीट का शुभारंभ, स्वामी भक्तिचारूजी महाराज का व्याख्यान हुआ

उज्जैन। इस्कॉन के आंगन में मंगलवार शाम दस देशों के भक्त श्रीकृष्ण भक्ति में जमकर झूमे। मौका था उज्जैन ग्लोबल रिट्रीट के प्रथम सत्र का। जैसे ही स्वामी भक्तिचारूजी महाराज ने हरे रामा...हरे कृष्णा... महामंत्र का गुंजन किया, भक्त आनंदित होकर नृत्य करने लगे। भक्ति के चरमोत्कर्ष का यह नजारा एक बार फिर 16 सितंबर को नजर आएगा, जब महानगर संकीर्तन के दौरान हजारों भक्त मृदंग की थाप पर धर्मनगरी उज्जयिनी की सड़कों पर झूमते निकलेंगे।

भागवतामृत पर आयोजित सेमिनार का शुभारंभ सुबह 11 बजे स्वामी भक्तिचारूजी महाराज के व्याख्यान के साथ हुआ। स्वामीजी ने बताया ब्रह्म संहिता श्रीमद् भागवत का विस्तृत रूप है। नारद मुनि जानना चाहते थे कि भगवान का सबसे श्रेष्ठ भक्त कौन है। इसकी खोज में वे देवलोक, ब्रह्मलोक, पृथ्वी लोक पर विचरण करते रहे। अंतोगत्वा ज्ञात हुआ राधारानी भगवान श्रीकृष्ण की परम भक्त हैं और वृंदावन श्रेष्ठ स्थान। पीआरओ राघव पंडित दास ने बताया इसी कथा पर अनेक दृष्टांत के द्वारा स्वामीजी चार दिन तक भक्तों को ज्ञान, योग और भक्ति का मार्ग बताएंगे।

रिट्रीट में साधक सी जीवनचर्या

ग्लोबल रिट्रीट में आए दस देशों के 200 से अधिक भक्तों की दिनचर्या साधक जैसी रहेगी। तड़के 4 बजे उठने के बाद नित्य नियम करना, 4.30 बजे मंगला आरती में शामिल होना, सुबह 5.30 से 7 बजे तक जप, ध्यान आदि करना, सुबह 7 बजे दर्शन आरती में शामिल होना, सुबह 7.45 से 9 बजे तक भगवत प्रवचन का श्रवण पश्चात 11 बजे सेमिनार में शामिल होना दैनंदिनी में शामिल है। शाम 5 बजे सेमिनार का दूसरा सत्र शुरू होगा। रात्रि 9 बजे भक्त शयन के लिए जाएंगे।