उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भस्मारती अनुमति में धांधली सामने आई है। अफसरों ने नियमोें को ताक में रखकर 1 ही दिन में 4 लोगों को 193 अनुमति जारी कर दी। इसमें नवनियुक्त मंदिर समिति सदस्य मित्तल के परिचितों को 71 तथा जिला प्रोटोकॉल के नाम पर कर्मचारी अभिषेक भागर्व को 76 लोगों की अनुमति जारी की गई है। अफसरों का कहना है कि मामले में गलती अवश्य हुई है। लेकिन दबाव में सब काम करना पड़ते हैं।

महाकाल मंदिर में भस्मारती दर्शन के लिए अनुमति की बाध्यता भ्रष्टाचार का कारण बन गई है। व्यवस्था में दलाल सक्रिय है जो श्रद्धालुओं से अनुमति के नाम पर मोटी रकम लेते हैं। समय समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। इसमें मंदिर के कर्मचारी, पुजारी, हारफूल व्यवसायी आदि के नाम भी सामने आते रहे हैं।

कई मामलों में मंदिर प्रशासन ने आरोपितों पर कार्रवाई भी की है। ताजा मामला 10 मार्च का है, जिसमें अधिकारियों ने नियमों को ताक में रखकर 4 लोगों को 193 परमिशन जारी कर दी। इसमें नवनियुक्त समिति सदस्य दीपक मित्तल को गणेश मंडपम् की 71 परमिशन दी गई है।

प्रोटोकॉल के नाम पर कर्मचारी अभिषेक भार्गव को गणपति मंडपम् की 54 तथा कार्तिकेय मंडपम् की 22 अनुमति जारी की गई है। इसी दिन धनगरसिंह के नाम नंदीहॉल की 20 तथा कार्तिकेय मंडपम् की 15 अनुमति जारी हुई है। गगनसिंह के नाम नंदी हॉल की 11 अनुमति बताई जाती है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें अधिकांश अनुमति में श्रद्धालुओं की उम्र तक नहीं लिखी गई है।

आम दर्शनार्थियों के लिए कई नियम

मंदिर में आम दर्शनार्थियों को भस्मारती अनुमति देने में अफसर आनाकानी करते हैं। दर्शनार्थियों को एक फॉर्म पर पांच लोगों से अधिक की अनुमति नहीं दी जाती है। श्रद्धालुओं को प्रत्येक व्यक्ति के आईडी कार्ड की फोटो कॉपी फार्म के साथ लगाना अनिवार्य किया है। आईडी कार्ड की फोटो कॉपी नहीं देने पर आम भक्त को अनुमति नहीं दी जाती है। प्रोटोकॉल अनुमति व्यवस्था में भी कई संस्थान के लोगों को नियमों का हवाला देकर परेशान किया जाता है। वहीं रसूखदार व सेटिंग से अनुमति लेने आने वाले व्यक्ति के लिए सारे नियम शिथिल कर दिए जाते हैं।

यह भी सवाल

जिला प्रशासन ने प्रोटोकॉल दर्शन व भस्मारती अनुमति के लिए कर्मचारी अभिषेक भार्गव को जिम्मेदारी दे रखी है। भार्गव प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों को वीआईपी दर्शन कराने के साथ भस्मारती अनुमति जारी कराते हैं। 10 मार्च को भी भार्गव के नाम 76 अनुमति जारी की गई है। बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रतिदिन इतनी बड़ी संख्या में प्रशासन के अधिकारी व उनके परिवार के लोग भस्मारती दर्शन करने आते हैं।

जिसे कलेक्टरों ने हटाया, उसे फिर दे दिया जिम्मा

मंदिर की स्थापना शाखा ने दो दिन पहले कर्मचारी जगदीश गौड़ की भस्मारती दर्शन व्यवस्था में ड्यूटी लगाई है। उक्त कर्मचारी पर भस्मारती में गड़बड़ी करने के आरोप हैं। इसी के चलते पहले तत्कालीन कलेक्टर संकेत भोंडवे ओर फिर कलेक्टर मनीषसिंह इस कर्मचारी को भस्मारती ड्यूटी से हटा चुके हैं। बावजूद स्थापना शाखा ने आला अधिकारियों के संज्ञान में लाए बिना इस कर्मचारी को फिर से भस्मारती ड्यूटी में तैनात कर दिया है।

इनका कहना है

मैंने कुछ परिचितों की अनुमति कराई है। मामले में जो भी जानकारी चाहिए मंदिर प्रशासक से बात करें।

-दीपक मित्तल, मंदिर समिति सदस्य

मित्तल को 71 अनुमति जारी की है। जिन लोगों की अनुमति जारी हुई है उनसे आईडी ली गई है।

-मूलचंद जूनवाल, प्रभारी अधिकारी भस्मारती व्यवस्था

कुछ व्यक्तियों को बड़ी संख्या में भस्मारती अनुमति जारी करने की जांच होगी। नए कर्मचारी को भस्मारती दर्शन व्यवस्था में किस के आदेश से पदस्थ किया गया इसकी जानकारी भी ली जाएगी।

शशांक मिश्र, कलेक्टर व महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध् समिति अध्यक्ष