उज्जैन। इस बार सिंहस्थ क्षेत्र सोलर लाइटों से जगमगाता नजर आ सकता है। नगर के प्रमुख 15 मंदिरों सहित सरकारी भवनों पर भी सोलर लाइट पैनल लगाने की कवायद चल रही है। साधु-संतों के पड़ावों में सोलर सहित विंड सिस्टम के माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 200 करोड़ खर्च प्रस्तावित है।

सिंहस्थ 2016 के कॉम्प्रहेंसिव प्लान के तहत सोलर, बायोगैस और विंड सिस्टम के जरिए बिजली उपलब्ध कराने की तैयारी तेज हो गई है। गुड़गांव (दिल्ली) की कंपनी इमरजेंट वेंचर इंडिया ने पूरे सिंहस्थ क्षेत्र का सर्वे कर रिपोर्ट बना रही है। यह रिपोर्ट सिंहस्थ मेला समिति के माध्यम से शासन को प्रस्तुत की जाएगी। प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिलने के बाद इसका काम शुरू हो सकेगा।

सोलर लाइटों के उपयोग से बिजली गुल होने या कमी पड़ने की स्थिति में किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी। इतना ही नहीं भोजन बनाने के लिए भी एनर्जी का उपयोग किया जा सकेगा। प्रस्तावित योजना के तहत शहर में 33 प्रतिशत सोलर लाइटिंग हो सकेगी। इसके लिए शहर में बड़े सोलर पैनल लगाए जाएंगे।

टंकियों पर भी पैनल

पानी की 46 टंकियों पर भी सोलर पैनल लगाने का प्रस्ताव है। इससे पेयजल की आपूर्ति में मदद मिलेगी। मंदिरों व सरकारी भवनों के अलावा बड़े शैक्षणिक संस्थानों को भी सोलर लाइटों से रोशन किया जाएगा।

जो प्रस्ताव तैयार हो रहा है, उसके मुताबिक सिंहस्थ क्षेत्र में 5 मेगावाट क्षमता का विंड सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इसके लिए पंखे लगाए जाएंगे। इससे हवा के माध्यम से बिजली उत्पन्न होगी जिससे पड़ावों आदि के लिए बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी। जिन मंदिरों में गौशाला है, वहां बायोगैस सिस्टम स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। यह भोजन बनाने के लिए उपयोग की जा सकेगी।