उज्जैन। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही महाकाल मंदिर में भस्मारती दर्शन के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सीधे प्रवेश मिलेगा। अफसर अनुमति की बाध्यता को समाप्त करने का मन बना रहे हैं। इसके लिए कलेक्टर शशांक मिश्र पूर्व अधिकारी, प्रबुद्धजन व नगरवासियों से रायशुमारी करेंगे। फिलहाल व्यवस्था में सुधार के लिए सुबह के समय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। कर्मचारियों की ड्यूटी में परिवर्तन के लिए कम्प्युटराइज्ड रोटेशन सिस्टम बनाया जा रहा है।

महाकाल मंदिर में सोमवार सुबह कलेक्टर ने अधिकारी व कर्मचारियों की साप्ताहिक बैठक ली। इसमें शिवरात्रि की तैयारी और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए मातहतों को निर्देश दिए। बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि भस्मारती दर्शन के लिए पूर्व में चली आ रही व्यवस्था में एकाएक परिवर्तन संभव नहीं है, लेकिन मीडिया के सुझाव को देखते हुए लगता है, इसमें कमी अवश्य है। निश्चित तौर पर अनुमति की बाध्यता को समाप्त करने से समस्या का हल हो सकता है। इसके लिए पुराने अधिकारी, प्रबुद्धजन व नगरवासियों से रायशुमारी करने के बाद ही निर्णय लेना उचित होगा। जल्द ही चर्चा की शुरुआत की जाएगी।

फिलहाल बिना अनुमति कोई भी व्यक्ति भस्मारती दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश ना कर सके, इसके लिए प्रतिदिन एक प्रशासनिक अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाएगी। वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों को रोटेट किया जाएगा। फिलहाल यह व्यवस्था कागजों पर है। इसलिए इस सिस्टम को कम्प्युटराइज्ड करने के निर्देश दिए हैं।

वीआईपी पास की व्यवस्था पर चौंके कलेक्टर

कलेक्टर को बताया गया कि महाकाल मंदिर में वीआईपी कल्चर को अफसर सालों से बढ़ावा दे रहे हैं। प्रतिवर्ष नागपंचमी व महाशिवरात्रि पर हजारों की संख्या में लाल, पीले, हरे वीआईपी पास छपवाए जाते हैं। मंदिर प्रशासन इन्हें कई विभागों व पार्टी, संगठन के लोगों को बांटता है।

यही नहीं महापर्व के दिन वीआईपी पासधारी और 250 रुपए के शीघ्र दर्शन टिकट वाले श्रद्धालुओं को एक ही गेट से प्रवेश दिया जाता है। इससे अव्यवस्था फैलती है। इस बात पर कलेक्टर चौंक गए और बोले इस विषय में तो मुझे अभी तक किसी ने कुछ बताया ही नहीं। अगर ऐसा है तो इस बार से इस प्रथा को बंद करने पर विचार होगा।

मंदिर व्यवस्था के संबंध में कलेक्टर को भ्रमित कर रहे अफसर

मंदिर के कंट्रोल रूम में मीडिया से चर्चा करते हुए कई बार ऐसा लगा कि अफसर मंदिर की व्यवस्थाओं के संबंध में कलेक्टर को भ्रमित कर रहे हैं। पत्रकयरों ने शिवरात्रि और मंदिर की व्यवस्था के संबंध में कई ऐसी जानकारी दी, जो अफसरों ने अब तक उन्हें नहीं दी थी।

चर्चा के दौरान उन्होंने कई बार प्रशासक अवधेश शर्मा की ओर देखा इस पर प्रशासक सफाई देते नजर आए। थोड़ी ही देर में कलेक्टर माजरा समझ गए और पत्रकारों से कहा कि इस संबंध् में मैं आप लोगों से अलग चर्चा करूंगा।

जिम्मेदारों को नोटिस देने की तैयारी

तीन दिन पहले कलेक्टर ने सुबह के समय मंदिर का निरीक्षण किया था। उस समय कोई भी अधिकारी मंदिर में मौजूद नहीं था। कर्मचारी भी मनमाने तरीके से काम कर रहे थे। मामले में अब जिम्मेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे। इससे व्यवस्था में सुधार होगा।