उज्जैन। महाकाल मंदिर में भस्मारती दर्शन व्यवस्था में कितनी खामियां हैं, रविवार तड़के कलेक्टर ने यह खुद देखा। रात दो बजे आम दर्शनार्थियों की तरह मंदिर पहुंचे कलेक्टर शशांक मिश्रा को सुरक्षाकर्मी भी नहीं पहचान पाए। उन्हें किसी ने रोका भी नहीं। कलेक्टर भस्मारती गेट से प्रवेश कर भीतर तक चले गए। इसके बाद जो नजारा सामने आया, उसे देख वे अवाक रह गए। कलेक्टर ने मौके पर ही अफसरों को फटकार लगाई।

जिस समय कलेक्टर मंदिर पहुंचे भस्मारती गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मी मोबाइल पर गेम खेल रहे थे। उन्हें किसी ने नहीं पहचाना और ना रोकने की कोशिश की। वे भीतर प्रवेश कर गए। यहां ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी अशोक लांडगे से व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली। इसी दौरान एक श्रद्घालु भीतर आ गया। उसने कर्मचारी को लेटरपेड दिखाया और कहा अधिकारी से हस्ताक्षर करा लिए थे। भस्मारती दर्शन करना है। यह देख कलेक्टर दंग रह गए। उन्होंने कर्मचारी से संबंधित अधिकारी को फोन लगाने को कहा।

कर्मचारी ने सहायक प्रशासक चंद्रशेखर जोशी को फोन लगाया और पूछा आपने लेटर पेड पर साइन किए हैं, लेकिन दर्शनार्थी ने फार्म भरकर अनुमति नहीं बनवाई है। अंदर जाने दूं या नही। इस पर जोशी ने कहा भूल गया होगा भीतर जाने दो। कलेक्टर को इस घटना से संपूर्ण व्यवस्था का मांजरा समझ आ गया। इसके बाद उन्होंने फोन पर ही जोशी को जमकर फटकार लगाई। साथ ही गेट पर तैनात होमगार्ड जवानों की किट जमा कराने के निर्देश दिए तथा निजी एजेंसी थर्ड आई के कर्मचारी को हटाने को कहा।

होमगार्ड जवानों को बचाने में लगे अफसर... हो सकता है बड़ा खुलासा

शनिवार को उत्तर प्रदेश के श्रद्घालुओं ने होमगार्ड के दो जवानों पर बिना अनुमति भस्मारती दर्शन कराने के लिए 2000 रुपए लेने का आरोप लगाया था। श्रद्घालुओं ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी। इसके बाद हड़कंप मच गया। अफसरों ने मंदिर प्रशासन से घटना के फुटेज मांगे ओर पड़ताल के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। रविवार को भी होमगार्ड के जवानों की लापरवाही सामने आई। बीते दो दिनों से कलेक्टर शशांक मिश्र कार्रवाई की बात कह रहे हैं। लेकिन पुलिस के अफसर कार्रवाई करने से बच रहे हैं। सूत्र बताते हैं अगर जवानों पर कार्रवाई हुई तो वे मुंह खोल देंगे। इससे भस्मारती में रुपए लेने वाले बड़े रैकेट का खुलासा हो सकता है।

भ्रष्टाचार रोकने के लिए प्रशासन गंभीर नहीं

महाकाल मंदिर में वीआईपी दर्शन व्यवस्था और भस्मारती दर्शन के लिए अनुमति की बाध्यता नासूर बन गई है। इस काम को एक बड़ा रैकेट अंजाम दे रहा है। इसमें मंदिर के भीतर व बाहर के लोग मिले हुए हैं, जो प्रतिदिन लाखों रुपए का व्यापार कर रहे हैं। इससे मंदिर की छवि देश दुनिया में खराब हो रही है। बावजूद प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। हालांकि नवागत कलेक्टर शशांक मिश्र ने इस पर रोक लगाने की बात कही है। बता दें अगर भस्मारती में अनुमति की बाध्यता समाप्त हो जाए तो मंदिर की आधी समस्या स्वतः समाप्त हो जाएगी।