उज्जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि। मतदान की तारीख नजदीक आते ही सियासी किरदारों और सांसद प्रत्याशियों की दिनचर्या और व्यस्त हो गई है। खास बात यह है कि अलसुबह से ही घर से निकलने के बाद दोनों दलों के प्रमुख कार्यकर्ता, पदाधिकारी और उम्मीदवार सीधे गांवों का रुख कर रहे हैं। कारण भी है। दोनों दलों को पता है कि जीत का रास्ता गांवों की पगडंडियों से ही निकलेगा। दोनों दलों के नेता दावा करते हैं कि किसान उनके साथ हैं और जीत भी तय है। कांग्रेस कर्ज माफी का वादा निभाने की बात कर रही है तो भाजपा इसी योजना की विसंगतियां गिना रही है। नोटबंदी से लेकर भुगतान में आने वाली समस्याएं ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्दा हैं।

बता दें कि विधानसभा चुनाव के दौरान संसदीय क्षेत्र में उज्जैन शहर की दोनों सीटें और महिदपुर को छोड़ कस्बाई इलाकों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस ने भाजपा को पटखनी दी थी। आठ में से पांच सीटें कांग्रेस ने जीतीं। पार्टी दावा करती है कि कर्ज माफी की योजना किसानों को पसंद आई और पिछली सरकार की नाकामी से नाराज किसानों ने कांग्रेस पर भरोसा जताया। इसलिए ग्रामीण सीटों पर जीत हुई। इधर भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने कर्ज माफी के नाम पर किसानों के साथ छल किया है। कई किसानों का ऋण अब तक माफ नहीं हुआ है। ग्रामीणों को कांग्रेस की सचाई पता लग गई है और इस बार वे फिर भाजपा को चुनने जा रहे हैं।

2014 में ये हुआ

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के चिंतामणि मालवीय ने कांग्रेस के प्रेमचंद गुड्डू (अब भाजपा में) को तीन लाख से अधिक मतों से हरा दिया था। दिलचस्प बात यह है कि 2013 के विधानसभा चुनाव में संसदीय क्षेत्र की सभी आठों सीटें भाजपा ने जीती थी। मगर इस बार समीकरण अलग दिखाई दे रहे हैं। इसलिए इस सीट पर मुकाबला कड़ा माना जा रहा है।