उज्जैन। आज 80 लाख से 1 करोड़ रुपए खर्च कर बनता है डॉक्टर। यही डॉक्टर निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर 2-4 लाख रुपए गरीबों से छीन लेते हैं। ऐसा कर डॉक्टर पिशाच का व्यापार कर रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवा शिविर के माध्यम से गरीबों की हर बीमारी का इलाज किया जा रहा है। स्वास्थ्य की चिंता प्रदेश के मुख्यमंत्री को है और यह सरकार की संवेदनशीलता है।

यह बात उज्जैन-आलोट के भाजपा सांसद डॉ. चिंतामणि मालवीय ने चरक चिकित्सालय में शुक्रवार को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य शिविर में अतिथि के रूप में कही। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जीना चाहता है। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहते हुए संपत्ति, जमीन-जायदाद बेच अपनों का इलाज करवाता है। वह किसी को खोना नहीं चाहता। डॉक्टर आज पिशाच का व्यापार कर रहे हैं, उन्हें मानवीयता बरतना चाहिए।

यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य के प्रति चिंता जताई है। अब जिला अस्पताल के डॉक्टरों को 2 लाख रुपए तक के इलाज करवाने के अधिकार भी दिए हैं। मुख्यमंत्री किडनी से लेकर गंभीर बीमारियों के लिए लाखों का अनुदान दे रहे हैं।

अब राज्य बीमारी सहायता निधि एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गंभीर बीमारियों का महंगा से महंगा इलाज करवाया जा सकता है। सांसद ने कहा कि पैसा वाले बड़े निजी अस्पतालों में चले जाते हैं किंतु सरकारी अस्पतालों में गरीब ही आते हैं, उनका सही इलाज होना चाहिए। स्वास्थ्य संचालक केके ठस्सू, संभागायुक्त एमबी ओझा, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष दिवाकर नातू ने भी संबोधित किया।

1 हजार पंजीयन हुए

शिविर में गंभीर बीमारी के मरीजों एवं बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों के करीब 1 हजार पंजीयन हुए। सभी की जांच के लिए इंदौर के निजी बड़े अस्पतालों का अमला भी शिविर में आया। चिकित्सकों ने ऑपरेशन योग्य मरीजों के एस्टीमेट बनाए। सिविल सर्जन डॉ.राजू निदारिया के अनुसार जिले का लक्ष्य 1200 मरीजों के पंजीयन का था।