उज्जैन। इंदौर में हुई बारिश से खान नदी का जलस्तर बढ़ने और शिप्रा में आए नर्मदा के पानी के दूषित होने के बाद एक बार फिर खान डायवर्शन योजना पर सवाल उठे हैं। 2016 में तत्कालीन सरकार ने 85 करोड़ रुपए की लागत से प्रोजेक्ट शुरू करवाया था। मकसद था खान का पानी शिप्रा में मिलने से रोकना। मगर योजना से कुछ खास फायदा नहीं पहुंचा। बरसात की शुरुआत में ही खान का पानी कच्चा डैम तोड़ते हुए शिप्रा में आ गया। इससे स्टॉपडैम में सहेजा गया नर्मदा का जल दूषित हो गया। अब ये ही पानी साफ कर शहर में सप्लाय किया जाएगा। इधर योजना को लेकर अधिकारियों ने कहा है कि बारिश के दौरान खान नदी के पानी को शिप्रा में मिलने से रोकना नामुमकिन है।

खान का गंदा पानी शिप्रा नदी (स्नान क्षेत्र त्रिवेणी घाट से सिद्घवट घाट तक) में ना मिले, इसके लिए प्रदेश सरकार ने साल 2016 में खान का रास्ता बदलने को 85 करोड़ रुपए से पाइपलाइन बिछाई थी। मगर इसका फायदा नहीं मिला। क्योंकि खान डायवर्शन प्रोजेक्ट वर्षाकाल समाप्ति के बाद की स्थिति को ध्यान में रखकर डिजाइन किया था। जल संसाधन विभाग के अफसरों का कहना था कि बारिश का पानी डायवर्ट करना संभव नहीं है। वह तो सीधे शिप्रा में मिलेगा ही।

खान डायवर्शन पाइपलाइन का फायदा अमूमन जनवरी से जून तक मिलेगा। यह वह समय होगा जब खान में सिर्फ इंदौर से निकले दूषित जल का पानी ही रहेगा। हालांकि मौजूदा वक्त में इंदौर नगर निगम का दावा है कि खान में अब ट्रीट किया हुआ पानी ही छोड़ा जाता है। मालूम हो कि खान डायवर्शन पाइपलाइन इंदौर रोड स्थित पिपल्याराघौ गांव के पास से बिछाई गई और इसका आउटलेट कालियादेह महल के आगे शिप्रा नदी किनारे है।

पाइपलाइन से लाए थे नर्मदा का पानी

मंगलवार को खान के पानी के कारण गऊघाट स्टापडेम में जमा नर्मदा का सारा पानी गंदा हो गया। नर्मदा का ये वही पानी था जो कुछ दिन पहले नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने प्राकृतिक प्रवाह और पाइपलाइन के जरिये उज्जैन में जल सप्लाई के लिए शिप्रा नदी में छोड़ा था। बता दें कि गंभीर डैम में पानी खत्म होने के बाद शहर की प्यास बुझाने के लिए नर्मदा का पानी उज्जैन लाया जा रहा है।

पहली बार उल्टी दिशा में बहा पानी

बोरी बंधान टूटने के बाद जैसे ही खान का पानी शिप्रा में मिला, वह उत्तर में न बहकर पूर्व दिशा की ओर बहा। ये दृश्य तब तक रहा जब तक त्रिवेणी घाट पानी से लबालब नहीं भराया। त्रिवेणी घाट पर पानी लबालब भराने के बाद नदी फिर उत्तरवाहिनी होती नजर आई। जानकारों ने कहा कि सूखी पड़ी शिप्रा में त्रिवेणी घाट पर लोग कम पानी में भी स्नान कर सकें, इसके लिए कुछ साल पहले जनसहयोग से एक ट्रेंच खोदी थी। इस ट्रेंच में ग्रेविटी का ध्यान नहीं रखा गया। इसलिए शुरुआत में जब पानी शिप्रा में बढ़ा तो वह पहले पूर्व की ओर और घाट लबालब भराने पर फिर सही दिशा पूर्व से पश्चिम-उत्तर की ओर बहा।