उज्जैन। वैशाख मास कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर 29 अप्रैल को पंचकोशी यात्रा की विधिवत शुरुआत होगी। ज्योतिष के अनुसार इस बार यात्रा की शुरुआत शततारका नक्षत्र में हो रही है। शततारका पंचक का नक्षत्र है। इस नक्षत्र की साक्षी में यात्रा करने से एक बार में पांच बार यात्रा करने का पुण्य फल प्राप्त होगा। इसलिए श्रद्घालुओं को निर्धारित तिथि पर यात्रा शुरू करना चाहिए।

ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला के अनुसार शततारका नक्षत्र में धर्मयात्रा करने से सौ प्रकार के तापों से मुक्ति मिलती है। श्रद्घालु को यात्रा का पांच गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। अर्थात एक बार में पांच बार यात्रा करने के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। पंचकोशी यात्रा पांच दिवसीय मानी गई है। चतुर्दशी पर यात्रा का नगर प्रवेश होगा। यात्री कर्कराज स्थित राती घाट पर विश्राम करेंगे। शनिवार को शनिश्चरी अमावस्या के स्नान के बाद भगवान नागचंद्रेश्वर को बल लौटाकर यात्रा का समापन होगा।

तय तिथि पर शुरू करें यात्रा

ज्योतिर्विद पं.आनंदशंकर व्यास ने बताया स्नान, दान व धार्मिक यात्रा में तिथि महत्वपूर्ण है। आमतौर पर देखा जाता है श्रद्घालु तय तिथि से एक दो दिन पहले ही यात्रा पर निकल जाते हैं। धर्मशास्त्रीय मान्यता में यह अनुचित है। इससे यात्रियों को यात्रा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। यात्रा के पूर्ण फल के लिए 29 अप्रैल को वैशाख कृष्ण दशमी पर यात्रा पर निकलना सर्वश्रेष्ठ है। इसी प्रकार मध्यरात्रि 12 बजे के बाद पर्व स्नान उचित नहीं है। श्रद्घालुओं को सूर्योदय के पश्चात ही स्नान करना चाहिए, इससे पर्व स्नान का पूर्ण फल प्राप्त होता है।