भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में पीएचडी और एमफिल प्रवेश परीक्षा में विवाद के चलते दोबारा प्रवेश परीक्षा 22 अप्रैल को होगी। बावजूद इसके बीयू प्रबंधन अब तक यह तय नहीं कर पाया है कि इसमें मैरिट कौन सी मान्य की जाएगी। इसकी मुख्य वजह यह है कि पिछली परीक्षा को बीयू ने अब तक निरस्त नहीं किया है। परीक्षा में गड़बड़ी के कारण ही दोबारा प्रवेश परीक्षा हो रही है इस कारण बीयू प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

इस तरह से दो परीक्षाओं की दो-दो मैरिट लिस्ट बन जाएंगी। हाल में बीयू ने पीएचडी प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित किया था। जिसमें अंक विभाजन को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए थे। बीयू ने अपनी सफाई भी दी लेकिन बावजूद इसके अभ्यर्थियों के आरोप बीयू प्रबंधन पर भारी पड़े। अंततः बीयू को दोबारा परीक्षा करवाना पड़ रही है। अभ्यर्थियों ने राजभवन तक में परीक्षा परिणाम में हुई गड़बड़ी की शिकायत की थी।

कैसे बनेगी मैरिट लिस्ट

बीयू ने प्रवेश परीक्षा की जो अधिसूचना जारी की है उसमें यह कहा गया है कि जो पिछली प्रवेश परीक्षा में पास अथवा फेल परीक्षार्थियों में से भी जो भी इस परीक्षा में शामिल होना चाहें वे 22 अप्रैल को होने वाली परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अब परीक्षा में पास हुए अभ्यर्थियों ने यह सवाल उठाए हैं कि इस बार प्रवेश परीक्षा में जो प्रश्न पत्र आएगा वह पिछली परीक्षा से भिन्न होगा। फिर बीयू मैरिट लिस्ट का निर्धारण कैसे करेगा।

गौरतलब है कि इस परीक्षा में उत्तीर्ण अंक 50 हैं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांगों के लिए 45 अंक हैं।

लाखों का खर्चा भी

बीयू के सूत्रों के मुताबिक दोबारा परीक्षा करवाने में लाखों रुपए का खर्च भी होगा। पिछली प्रवेश परीक्षा में करीब चार हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे इस बार कितने छात्र शामिल होंगे तय नहीं है लेकिन प्रश्न पत्र निर्धारण, प्रकाशन और परीक्षा के आयोजन में बीयू को मोटी रकम खर्च करना होगी। जानकारों का कहना है कि अगर पहली बार की प्रवेश परीक्षा में ही सावधानी बरती जाती तो ऐसी नौबत नहीं आती।