भोपाल। बड़ी से बड़ी लैब में जिन बीमारियों की पहचान करने में समय और पैसा लग जाता है यह काम वैद्य की तीन अंगुलियां नाड़ी देखकर आसानी से कर सकती हैं। यह कहना है मुंबई के जाने-माने नाड़ी वैद्य डॉ. राजेश छाजेड़ का। वे राजधानी के पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज में 12 फरवरी से चल रहे नाड़ी विज्ञान कार्यशाला में बतौर विशेषज्ञ बोल रहे थे। उन्होंने एक मरीज से कुछ पूछे बिना ही बता दिया कि उसे रुमेटायड आर्थराइटिस है। यह देख कार्यशाला में मौजूद विशेषज्ञ चकित रह गए।

डॉ. छाजेड़ ने बताया कि लिवर की बीमारियां, आर्थराइटिस, हृदय रोग आदि में तो नाड़ी देखकर बीमारी को शुरुआत में ही पकड़ा जा सकता है। उन्होंने बताया कि तीनों अंगुलियां अलग-अलग चीजों के बारे में बताती हैं।

मित्तल आयुर्वेद कॉलेज मुंबई के प्रोफेसर डॉ. विनायक तायड़े ने बताया कि वात, पित्त और कफ तीनों के पांच-पांच प्रकार होते हैं। वैद्य की तीनों अंगुलियां वात, पित्त और कफ के पांचों तरह का परीक्षण करती है। इससे यह भी पता चल सकता है कि कौन सी बीमारी ठीक हो सकती है और कौन सी असाध्य है। पित्त से होने वाले रोग, हृदय रोग आदि में नाड़ी देखकर आसानी से बीमारी का पता लगाया जा सकता है।

कार्यशाला के शुभारंभ के मौके पर मंगलवार को आयुष कमिश्नर संजीव झा ने कहा कि नाड़ी विज्ञान पर रिसर्च को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इस तरह की कार्यशाला होती रहनी चाहिए। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. उमेश शुक्ला ने बताया कि कार्यशाला में पूरे प्रदेश से करीब 90 चिकित्सक भाग ले रहे हैं। विशेषज्ञ उन्हें नाड़ी पकड़कर यह कला सिखा रहे हैं।

त्वचा रोगों की जांच व इलाज के लिए शिविर 20 तक

पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान में त्वचा रोगों की जांच व इलाज के लिए निःशुल्क शिविर लगाया गया है। 11 फरवरी से शुरू हुए शिविर में ओपीडी समय में मरीजों का इलाज किया जाता है। अस्पताल के डॉ. राजेश मेश्राम ने बताया कि रोगियों का निःशुल्क पंजीयन, परामर्श, औषधि वितरण व पंचकर्म किया जाएगा। इसके अलावा पंचकर्म व काय चिकित्सा विभाग की ओर से निःशुल्क वमन कैंप का आयोजन भी किया जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक वमन क्रिया का श्वास रोग, एलर्जी, पराना सर्दी-जुकाम, दाद, एग्जिमा, ब्रोंकाइटिस, शीत पित्त, सफेद दाग में काफी फायदा मिलता है। बसंत ऋतु में वमन क्रिया के ज्यादा फायदे हैं। कॉलेज में 15 फरवरी से 20 फरवरी के बीच यह शिविर आयोजित किया जा रहा है।