- होमलोन की किश्त नहीं चुकाई तो फायनेंस कंपनी ने घर पर चस्पा किया नोटिस

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विदिशा। कंपनी द्वारा मृतक के घर पर मकान बंधक होने की चेतवानी लिखी गई।

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विदिशा। कंपनी के दफ्तर के सामने शव रखकर बिलखते परिजन।

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विदिशा। अधिकारियों से चर्चा करते परिजन।

विदिशा। नवदुनिया प्रतिनिधि

होमलोन की किश्त नहीं चुकाने के कारण कंपनी ने एक मजदूर के मकान पर मकान के बंधक होने की सूचना चस्पा कर दी। इसी से परेशान होकर मजदूर ने अपने ही घर में फांसी लगा ली जिससे उसकी मौत हो गई है। मृतक की पत्नी का कहना है कि कंपनी की किश्त जमा करने के लिए उन्होंने एक साहूकार से भी 50 हजार रुपए लिए थे। एक साल बाद ही साहूकार भी साढ़े तीन लाख रुपए की मांग कर रहा था। मौत होने के बाद मृतक के शव को लेकर परिजन इंडिया शेल्टर फायनेंस कंपनी दफ्तर जा पहुंचे जहां खूब हंगामा मचाया। बाद में मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अफसरों को कंपनी और साहूकार पर हत्या का मामला दर्ज करने और कंपनी से मकान की रजिस्ट्री दिलाने संबंधी ज्ञापन एसडीएम प्रवीण प्रजापति को दिया।

करैयाखेडा रोड राजा भैया की कॉलोनी निवासी मृतक 38 वर्षीय राजेश सिलावट की पत्नी बेनीबाई ने बताया कि 4 साल पहले उन्होंने इंडिया शेल्टर फायनेंस कंपनी से 4 लाख रुपए का कर्ज लिया था। पति राजेश मजदूरी कर हर माह करीब 6 हजार रुपए की किश्त चुकाता रहा। एक साल पहले वह सड़क दुर्घटना में घायल हो गया। उसका उपचार कराने और कंपनी की किश्त जमा करने के लिए डा. संतोष जाट से 50 हजार रुपए की राशि ली थी। उसने राजेश से साढ़े तीन लाख रुपए का चेक ले लिया था। इसके अलावा कुछ खाली चेक भी लिए हैं। इन्हीं लोगों की प्रताड़ना से तंग आकर शुक्रवार की तड़के अपने मकान के ऊपर टीन के शेड पर तोलिया से फंदा बनाकर फांसी लगा ली। मृतक के पुत्र अंकित ने बताया कि सुबह करीब 5 बजे जब मां बेनीबाई छत पर गईं तो पिता फांसी पर लटके थे। उनकी आवाज सुनकर सभी की नींद खुल गई। आसपास के लोग पहुंच गए। इस दौरान पुलिस को भी सूचना दी गई।

तीन साल में 2 लाख जमा किए, फिर भी 4 लाख में से 3 लाख 85 हजार रुपए बचे

पत्नी बेनीबाई के मुताबिक उन्होंने फायनेंस कंपनी से 4 लाख रुपए का कर्ज लिया था। तीन साल तक हर माह 6 हजार रुपए से ज्यादा की किश्त जमा की गई। दो लाख से ज्याद की राशि जमा कर दी गई है। इसके बाद भी कंपनी कर्मचारी 7 लाख रुपए से ज्यादा कर्ज बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 10 माह से किश्त जमा नहीं की तो कंपनी ने मकान की दीवार पर लिखवा दिया कि यह मकान इंडिया शेल्टर फायनेंस में बंधक है। इसकी खरीदी और एवं विक्री हेतु शाखा से संपर्क करें। कंपनी द्वारा यह लिखवाने से उनका पति आहत था। इस संबंध में कंपनी के ब्रांच मैनेजर वीरेन्द्रसिंह परमार ने बताया कि बेनीबाई के नाम से 4 लाख रुपए का कर्ज लिया गया था। हर माह 6 हजार 157 रुपए की किश्त बनाई गई थी। करीब 10 माह से किश्त जमा नहीं की गई थी। नियमानुसार 3 माह तक किश्त जमा नहीं करने के बाद नोटिस दिया जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसी जानकारी मिली थी कि राजेश चुपचाप मकान बेचना चाह रहा था। इसलिए उनके मकान पर बंधक होने की सूचना लिखवाई गई थी। उनके मुताबिक 3 लाख 85 हजार रुपए का कर्ज है। किश्तों में 15 साल में राशि चुकाने पर यह राशि 7 लाख के आसपास पहुंच जाएगी।

जमीन बेचकर कर्ज देने की बात कही थी

मृतक राजेश के पिता करणसिंह सिलावट ने बताया कि वह भोपाल में रहते हैं। दो दिन पहले मृतक ने उन्हें फोन करके बताया था कि वह कर्ज से परेशान है। कंपनी की किश्त जमा नहीं कर पा रहा है। इधर डा. का कर्ज भी है। इसलिए वह जमीन बेचना चाहता है। उनके मुताबिक करीब उनके पास आधा एकड़ जमीन थी। इसे बेचकर कर्ज चुकाने बात कही थी। होली का त्योहार भी नहीं हो सका और उसने यह कदम उठा लिया। उनका एक ही बेटा था। दोषियों पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। मौके पर पहुंचे सीएसपी बीबी शर्मा, तहसीलदार आशुतोष शर्मा, टीआई राजेश सिन्हा ने उन्हें मामले की जांच कर उचित कार्यवाही का भरोसा दिलाया है।

एक घंटे तक रखा रहा शव

नाराज परिजन पीएम होने के बाद शव को घर लेकर कंपनी के दफ्तर पहुंच गए और मुख्य गेट के सामने शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस की समझाइश के बाद लोगों ने चक्काजाम नहीं किया गया। परिजन कंपनी के कर्मचारी और डाक्टर पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए। इसके बाद प्रशासनिक अफसर मौके पर पहुंचे और परिजनों से चर्चा कर आवेदन देने की बात कही। इसके बाद मौके पर ही परिजनों ने आवेदन लिखा और एसडीएम को देकर कार्यवाही की मांग की गई। इस दौरान करीब एक घंटे तक सिविल लाइन मार्ग पर लोगों की भीड़ लगी रही।

आवेदन में लगाया जबरदस्ती लोन देने का आरोप

प्रदर्शन के बाद पत्नी के हवाले से पार्षद ब्रजेन्द्र वर्मा ने एसडीएम प्रवीण प्रजापति को ज्ञापन दिया है। जिसमें बताया गया है कि उसके पति राजेश को बहला फुसलाकर कंपनी के कर्मचारियों ने जबरदस्ती होमलोन दिया था। बाद में कंपनी द्वारा दी गई राशि कर्मचारियों ने निकलवार अपने पास रख ली। उन्हें राशि नहीं दी गई और मकान पर भी जबरदस्ती बंधक बनाने की बात लिखी गई है। इसके अलावा डा. संतोष जाट द्वारा 50 हजार की जगह साढ़े तीन लाख रुपए की डिमांड से प्रताडित होकर राजेश ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। इसलिए कंपनी और डाक्टर पर प्रकरण दर्ज किया जाए।