विदिशा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघ चालक डॉ. मोहन भागवत का कहना है कि इन दिनों देश में परिस्थितियां बदल रही हैं। हिंदुओं को तोड़ने की कोशिशें की जा रही हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए संघ को अपनी कार्यशैली में बदलाव लाने की जरूरत है। हिंदुओं का विश्वास क्यों डिगा और उन्हें कैसे जीता जा सकता है, इस पर विचार करने की जरूरत है। इसके लिए स्वयंसेवकों को गरीब और पिछड़ा वर्ग के बीच अपनी पैठ मजबूत करनी होगी। वह शनिवार को मप्र के विदिशा में आयोजित मध्यक्षेत्र के कार्यकारिणी सदस्यों को संबोधित कर रहे थे।

टीलाखेड़ी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय बैठक के अंतिम दिन संघ प्रमुख ने विभाग, प्रांत और क्षेत्र पदाधिकारियों की बैठकें ली। चार अलग-अलग सत्रों में हुई बैठकों के बाद सामूहिक बैठक हुई। जिसमें भागवत ने गुजरात चुनाव में उत्पन्न हुए हालात और महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में मराठाओं और दलितों के बीच हुए संघर्ष को गंभीर बताते हुए कहा कि कुछ लोग हिंदुओं को तोड़ने में लगे हुए हैं। इन स्थितियों को देखते हुए संघ को भी अपनी कार्यशैली में बदलाव लाकर कार्य करना होगा। बैठक में उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की शाखाओं के विस्तार, शहरी शाखाओं की संख्या में वृृद्घि और संघ की शाखाओं से युवाओं को जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संघ के सूचनातंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।

जन चेतना के लिए जनजागरण पर जोर

संघ प्रमुख ने बैठक के तीनों दिन सामाजिक समरसता को महत्वपूर्ण बताया। इसके लिए उन्होंने जनजागरण पर जोर देते हुए गतिविधियां संचालित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि समाज में ऊंच-नीच और भेदभाव मिटाने के लिए एक कुआं, एक मंदिर और एक श्मशान की अवधारणा को अमल में लाया जाए। संघ के स्वयंसेवक ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरण कर पानी, मंदिर और श्मशान की व्यवस्था सुनिश्चित करें जो सबके लिए हो। इसके अलावा उन्होंने संघ की गतिविधियों के अलावा समाज की 20 श्रेणियों में काम करने की बात कही। जिनमें वकील, डॉक्टर, प्राध्यापक, कर्मचारी, श्रमिक आदि शामिल हैं। इन वर्गों में संघ की टोलियां अपनी जगह बनाएं।

दलित और आदिवासियों पर रहा फोकस

भागवत के उद्बोधन में उनका पूरा फोकस दलित, आदिवासियों और गरीब तबकों पर रहा। उन्होंने कहा कि आज देश को बांटने की कोशिशें हो रही हैं। समाज के निचले तबके में लीडरशिप नहीं होने के कारण दूसरे लोग लाभ उठा रहे हैं। इन स्थिति से निपटने के लिए इस गरीब तबके में भी लीडरशिप खड़ी करनी होगी। धर्मांतरण और जातिगत भेदभाव को समाप्त करने पर जोर देते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि इस समस्या को दूर करने के लिए संघ को और अधिक मेहनत करने की जरूरत है।