लाख्या, गोपालपुरा एवं सुल्तानिया में पसरा जल संकट

राजगढ़। जहां एक और हर हाल में ग्रामीणों को सुलभ तरीके से पेयजल उपलब्ध कराया जाना है वहीं दूसरी और कई गांवों में पेयजल संकट ने पैर पसार रखे हैं। स्थिति यह है कि यहां पर अब ग्रामीणों को चार-पांच किमी दूर से तक पीने का पानी लाना पड़ रहा है। मामले की जानकारी जिम्मेदारों को होने के बाद भी ग्रामीणों की सुनवाई नहीं हो पा रही है।

जानकारी के मुताबिक राजगढ़ तहसील के ग्राम लाख्या, गोपालपुरा एवं सारंगपुर के सुल्तानिया में इन दिनों पेयजल संकट की स्थिति बनी हुई है। तीनों गांवों के लोगों को पीने का पानी दूर-दराज सेलाना पड़ रहा है। इन गांवों में या तो पेयजल के लिए नलजल योजनाएं नहंी हैं या फिर चालू नहीं है। हैंडपंप हैं, लेकिन जलस्तर गिरने के कारण वह बंद हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में अब पीने का पानी भी नहीं मिल पा रहा है।

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1 पांच किमी दूर से ला रहे पानी

ग्रामलाख्या

आबादी1100

हैंडपंप07

चालू00

नलजल योजना नहीं

करीब 11 लोगों की आबादी वाले गांव लाख्या की स्थिति काफी खराब है। यहां पर सभी सात हैंडपंप बंद है। गांव में पिछले तीन दिन पहले हवा आंधी चलने के कारण यहां अटल ज्योति के तीन पोल टूट गए। जिसके कारण निजी कुए से जो पानी मिल रहा था वह भी बंद हो गया। अब ग्रामीणों को 5 किमी दूर खेतों से पानी लाना पड़ रहा है। गांव में नलजल योजना नहीं होने के कारण यह लोग गांव के बाहर कुओं पर रखे डीजल पंपों के सहारे पानी भरकर लाते है।

भागीरथ बन दे रहे थे पानी

लाख्या के ही रहने वाले अमृतलाल, पर्वतसिंह एवं बालूसिंह ने गांव में पेयजल संकट को देखते हुए अपने कुए से गांव तक एक पानी का पाईप लगाकर गांव तक पानी पहुंचा दिया था, ताकि लोगों को पेयजल सुलभ हो सके। यहीं पर ग्रामीण पानी भर लेते थे, लेकिन पोल टूटने के करण पानी की सप्लाई बंद हो गई। तब से ही ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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2 18 हैंडपंप बंद, बाइकों से ला रहे पानी

ग्रामसुल्तानिया

आबादी4600

हैंडपंप19

चालू01

नलजल योबंद

सारंगपुर तहसील के गांव सुल्तानिया की हालत भी पानी को लेकर खस्ताहाल बनी हुई है। करीब 4600 की आबादी वाले गांव में यूं तो 19 हैंडपंप है, लेकिन उसमे से 18 बंद है। नलजल योजना भी गांव में है, लेकिन वर्षो से बंद पड़ी है। जिसके कारण ग्रामीणों को गांव के बाहर ही पानी के लिए निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों की माने तो उन्हें अबहर दिन दो किमी दूर गांव के बाहर से बाइकों, बैलगाड़ियों के माध्यम से पानी लाना पड़ रहा है। बाइकों से कैनों के सहारे यहां के लोग पीने का पानी लाने को मजबूर है।

नहीं हुए प्रयास

ग्रामीणों की माने तो यहां की पेयजल की दिक्कतें दूर करने के लिए कोई समुचित प्रयास नहीं हो सके। दो टयूबवेल लगवाए थे, लेकिन उनमें भी पानीं नहीं निकला। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां की प्यास तब तकनहीं बुझेगी जबतक की किसी डैम या नदी से पाईप लाईन के माध्यम से पानी नहीं आएगा। बड़ा गांव है इसलिए टयूबेवलों से पर्ति संभव नहीं।

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3 दो टंकी, दोनों ही बंद

ग्र्रामगोपालपुरा

आबादी550

हैंडपंप02

चालू00

नलजल योबंद

राजगढ़ ब्लाक के गोपालपुरा की स्थिति भी खराब है।यहां पर भी पानी के लिए ग्रामीणों को दूर-दूर जाना पड़ता है। यहां के लोग हरदिन दो किमी दूर से पानी लाते हैं। होने को तो यहां पर दो हैंडपंप है, लेकिन दोनों में रूक-रूककर पानी आता है। कुल मिलाकर बंद की स्थिति में है। गांव में नलजल योजना की दो टंकियां भी है, लेकिन दोनों चालू नहंी है। जिसके कारण ग्रामीणों को दो किमी दूर कुओं से पीने का पानी लाना पडता है।

बनने के बाद से नहीं डला एक बूंद पानी

गांव में नलजल योजना के तहत पानी की दो टंकियों का निर्माण तो किया गया, लेकिन खास बात यह है कि उनमें बनने के बाद से अभी तक एक बूंद भी पानी की सप्लाई नहीं हो सकी। कुल मिलाकर शो-पीस का काम नलजल योजना की टंकियां कर रही है। जिसके कारण ग्रामीण भी नाराज है।

फोटो 1805 आरएजे 03 खुजनेर। लाख्या गांव में निजी स्तर पर डाली गई नली से पानी भरने ऐसे लगती है भीड़। हालांकि तीन दिन से यहां पानी आना बंद है।

फोटो 1805 आरएजे 04 सुल्तानिया। बाइकों के माध्यम से पानी लाने का प्रयास।

फोटो 1805 आरएजे 05 नरसिंहगढ़। बलवटपुरा मे पानी की टंकी से पानी भरने मशक्कत करते वार्डवासी।