-ब्लाक में आयोजित प्रदेश व्यापी परिवेदना में शिविर में आई 1982 तक की लंबित शिकायतें

-शिक्षकों का कहना न शासन के आदेश मान रहे न शिकायत करने पर होती है सुनवाई

फोटो 135 सीहोर। परिवेदना निवारण शिविर में आवेदन देते शिक्षक

फोटो 136 सीहोर। परिवेदना निवारण शिविर में मौजूद शिक्षक-शिक्षिकाएं।

सीहोर। शुक्रवार को स्कूल शिक्षा विभाग की समस्याओं के निराकरण के लिए प्रदेश व्यापी विकासखंड स्तर पर परिवेदना निवारण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों शिक्षकों ने अपनी शिकायतें शिविर में शामिल होकर आवेदन देकर संकुल प्राचार्यों को दी। साथ ही एम शिक्षा मित्र पोर्टल पर दर्ज कराई। इस दौरान अंशदान कटोत्रा, पदक्रम सूची अपडेशन, प्रान किट, ग्रीन कार्ड का लाभ नहीं मिलने से अग्रिम वेतनवृद्घि रुकने, एक साल पहले आदेश होने के बाद भी समयमान वेतनमान नहीं मिलने सहित 1982 से अभी तक वेतन निर्धारण नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं। इस दौरान 76 शिकायत दर्ज हुई, जिसमें से 34 संकुल स्तर व 42 शिकायतें डीईओ व डीपीआई स्तर की होने पर कार्रवाई के लिए भेजा गया।

जानकारी के अनुसार प्रतिवर्ष ब्लाक स्तर पर स्कूल शिक्षा विभाग स्थापना संबंधि समस्याओं के निराकरण के लिए परिवेदना निवारण शिविर का आयोजन करता है, जिसमें शिक्षक व कर्मचारी अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए मय दस्तावेज के आवेदन प्रस्तुत करते हैं, लेकिन इस बार विकासखंड स्तर पर प्रदेश व्यापी शिविर का आयोजन किया। इस दौरान लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के उप संचालक व जिला शिक्षा प्रभारी एसके परसाई, बीईओ व उत्कृष्ट प्राचार्य आरके बांगरे सहित संकुल प्राचायों की उपस्थिति में शिक्षकों की समस्याओं के प्रतिवेदन लिए गए। सीहोर ब्लाक में 181 प्राशा, 165 माशा, 29 हाई स्कूल व 19 हायर सेंकडरी स्कूलों के करीब 3 हजार शिक्षकों के लिए परिवेदना निवारण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें सुबह 10.30 से शाम 5.30 तक 76 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें 34 आवेदन संकुल स्तर पर और 42 आवेदन डीईओ व डीपीआई स्तर पर निराकरण के लिए भेजे गए। हालांकि इस दौरान कम ही शिक्षक शिकायत लेकर मौजूद हुए क्योंकि कई शिक्षक व्यक्तिगत तो कई शिक्षक एक साथ कई शिक्षकों की समस्याएं निवारण के लिए आए थे।

अगले साल रिटायरमेंट, नहीं बन पाया प्राचार्य

प्रतिवेदना निवारण शिविर में पहुंच टैगोर हाईस्कूल के प्राचार्य वीएन पाल ने बताया कि शासन स्तर से 5 साल बीतने के बाद भी पदक्रम सूची का अपडेशन नहीं किया गया, जिससे प्रमोशन का लाभ नहीं मिल पाया। जबकि अगले साल रिटायरमेंट होना है। इससे वरिष्ठता का हनन हुआ है।

शासन ने किया एक साल पहले आदेश, 65 व्याख्याता अभी भी वंचित

उत्कृष्ट स्कूल सीहोर के व्याख्याता अशोक राठौर ने बताया कि एक साल पहले शासन स्तर से व्याख्याताओं के समयमान वेतनमान के आदेश हो चुके हैं, लेकिन जिला स्तर से कार्रवाई नहीं होने से 65 व्याख्याताओं को इसका लाभ नहीं मिल पाया है।

5-5 माह का अंशदान कटने के बाद भी नहीं हुआ जमा

निवारण शिविर में पहुंचे अध्यापक संवर्ग ने आवेदन दिया कि हम लोगों का विभागीय स्तर पर अंशदान काटा गया है, लेकिन 4 से 5 माह का शासन स्तर से जमा नहीं किया गया, जिससे ब्याज का नुकसान हो रहा है, वहीं काटी गई राशि किसके खाते में जमा की जा रही है।

अभी तक नहीं हो पाया वेतन निर्धारण

प्रतिवेदना निवारण शिविर में पहुंचे संकुल केंद्र उल्झावन के तहत आने वाले टिेटोरा के शिक्षक बीएस नरोला सहित अन्य शिक्षक ने आवेदन देते हुए बताया कि नियुक्ति दिनांक 1982 से अभी तक नियमित वेतनमान का लाभ मिलना था, लेकिन डीईओ को आवेदन देने के बाद भी अभी तक लाभ नहीं मिल पाया है। जबकि विभाग द्वारा नियुक्ति दिनांक से नियमित वेतनमान लाभ देने के आदेश शासन स्तर से हो चुके हैं।

प्रतिवेदन शिविर में इन समस्याओं के निराकरण की रामगोपाल सेन ने की मांग

-कलेक्ट्रेट में 8 अगस्त 2017 को जनसुनवाई में अतिशेष के विरुद्घ जिले के 60 शिक्षकों ने विभिन्न माध्यम से आवेदन दिए थे, उन सभी के आवेदन के आधार पर कलेक्टर के निर्देश पर डीईओ द्वारा संकुल प्राचार्यों को निर्देश दिए थे कि जो शिक्षक अनाधिकृत रूप से शाला से अनुपस्थित होकर जनसुनवाई में पहुंचे थे, उनका एक दिन का वेतन काटा जाए, लेकिन संकुल प्राचार्यो ने बिना जांच के ही वेतन काट दिया, जिसे दिलाया जाए।

-शासन ग्रीष्मावकाश में विभिन्न कार्यक्रम जैसे मध्या- भोजन, स्कूल चलो अभियान, कार्यालयीन कार्य आदि के लिए प्रअ व शिक्षकों से ड्यूटी कराते है, जिन्हें 15 दिन का अवकाश संरक्षित किया जाना चाहिए। क्योंकि 2007 से यह प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है।

-संकुलों में शिक्षकों की सेवापुस्तिका अद्यतन नहीं हुए, जिससे सातवें वेतनमान से वंचित हैं।

-तृतिय समयमान वेतनमान 30 साल की सेवा पूर्ण करने पर देने के लिए शासन ने दो माह पूर्व आदेश जारी किए, लेकिन जिले स्तर पर उसका पालन नहीं हुआ।

-सेवानिवृत्त होने के बाद शिक्षकों को उनके सेवा अभिलेख में दर्ज अवकाश संरक्षित के आधार पर नगदीकरण की सुविधा है, लेकिन जिला कोषालय अधिकारी इसे न मानते हुए 30 साल पुराना आदेश मांग रहे हैं, जो संभव नहीं है।