नर्मदा और किसानी की जंग की हुंकार भोपाल में

29 मई खलघाट में जुटेंगे, 30 मई पीथमपुर, 31 मई इंदौर और देवास 1 जून सीहोर, 2 और 3 जून पैदल यात्रा सीहोर से 4 जून भोपाल में जनअदालत

भोपाल। आज नर्मदा घाटी और किसानी दोनों संकट में है। अमरकंटक से भरुच तक की घाटी समस्याओं के हाहाकार में फसाई जा रही है। नर्मदा का व्यवसायीकरण, दोहन, अवैध रेत खनन तथा जलाशयों के महाव्यवसाय की ठेकेदारी के कारण नर्मदा नदी और किनारे रहने वाले सामुदायिक जिंदगी दांव पर लगा हुआ है। बड़े बांधों के जलाशयों में संचित जल को भी धनिक पूंजीपति और उद्योगपतियों को देने की सरकार की साजिंश् को समझना होगा तथा नर्मदा के पानी के बटवारें का सवाल उठाना होगा। नर्मदा की मप्र की धारा की अविरलता, प्राकृतिक निरंतरता के साथ जीवनधारा को बचाने के लिए संगठित होकर नीति निधारकों से कड़े सवाल और खड़े सवाल करने होंगा। बरगी से सरदार सरोवर तक नर्मदा घाटी के बांधों से विस्थापित समुदायों का सवाल नर्मदा घाटी में यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा है।

प्रदेश सरकार नर्मदा से नदी जोड़ों लिंक परियोजनाओं के नाम पर मालवा क्षेत्र के 70 शहरों तथा 3000 गांवों को पानी देने का दावा कर रही है। 5000 से 10000 लिटर्स प्रति सेकण्ड पानी उठाने वाली परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से जलाशयों नहरों में पानी बचेगा या नहीं नर्मदा किनारे ताप व परमाणू विद्युत परियोजना को आगे बढ़ाने से नर्मदा नदी तो राख से खाक होगी। आज देश में किसानी याने प्राकृतिक संसाधनों पर जीने वाले सभी समुदाय अपनी आजीविका एक घाटे का सौदा होने के कारण संसाधन विशेषतः कृषि भूमि भी खो रहें है। आत्महत्या या संसाधन और ऐसे समुदाय की हत्या इसी का नतीजा है। कार्पोरेटी विकास और प्राकृतिक जनविकास के बीच में जो भयावह गैरबराबरी है इसे भी मिटाने की जरुरत है अन्यथा न ही नर्मदा घाटी भूमि बचेगी, न नर्मदा बचेगी और न ही प्रकृति और खेती।

आंदोलन कर यह मांगे उठाएंगे

इस जंग में अहम मांग पुरजोर रूप से उठाई जाएगी कर्ज माफी की। किसान अपनी ताकत से आवाज उठाएंगें और इसी जंग में किसानों को फसल की किमत डेढ़ गुना तथा कर्ज माफी नही होने के कारण वे आत्महत्या के लिए बाध्य है, इस मुद्दे को भी उठाया जाएगा। मध्यप्रदेश में हर दिन पांच किसानों की आत्महत्या होना हमारे लिए असहनीय है। जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को स्थानीय समुदाय को बेदखखल कर कार्पोरेट्स को देने से विस्थापन और वंचना को आगे बढ़ाया जा रहा है।