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कैप्शन। सत्संग चौक पर पं रामलाल शर्मा स्मृति में प्रवचन देते हुए स्वामी विवेकानंद सरस्वती।

होशंगबाद। पंडित रामलाल शर्मा स्मृति समारोह में पूज्य स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने अपने अमृत वचन व्यक्त करते हुए कहा कि सत्यम परम धीमहि भागवत के नाम को केंद्र में रखकर व्याख्या प्रारंभ की संत परंपरा की महिमा कि आपने व्याख्या करते हुए कहा कि सत्संग और संत की महिमा अवर्णीय है। नर्मदा भूमि को नमन करते हुए आपने नर्मदा महात्म एवं भारतीय संस्कारों का उल्लेख किया। आपने मातृभूमि के प्रति भी आपने प्रेम का आह्वान किया राष्ट्र धर्म की व्याख्या करते हुए आपने कहा कि कर्म का वास्तविक स्वरुप सामने आना चाहिए जहां धर्म नहीं होगा वहां कुछ कालखंड में प्रतिष्ठा भले ही प्राप्त हो जाए किंतु कालजई होने के लिए राष्ट्र का धर्म निश्चित होना चाहिए जिसका सभी को पालन करने में ही राष्ट्र सुरक्षित रह सकता है निज धर्म के साथ-साथ व्यक्ति को राष्ट्र धर्म का भी बोध होना चाहिए।

विविधता वाले इस देश में जहां विविध धर्म संस्कृति प्रथाएं एवं अन्य विविधताएं हैं वहां राष्ट्रधर्म का ना सिर्फ परिभाषित होना जरूरी है बल्कि प्रत्येक नागरिक को इस हेतु सजक होकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका का निर्वहन आवश्यक है कार्यक्रम के प्रारंभ में पूज्य महाराज जी का स्वागत पंडित गिरिजा शंकर शर्मा पूर्व विधायक, महंत परमेश्वर दास जी , एल एल दुबे ,चंदन सिंह परिहार ,श्री अशोक पालीवाल ,श्री राम शंकर चतुर्वेदी ,प्रमोद सिंह पटेल ,लक्ष्मी नारायण वर्मा ,मोहन सिंह वर्मा ,डॉक्टर नर्मदा प्रसाद सिसोदिया आदि ने किया भजनांजली उनके अंतर्गत कुमारी दामिनी पठारिया द्वारा भजन की प्रस्तुति की गई श्री राम परसाई ने हारमोनियम एवं श्री राम सेवक शर्मा ने तबला आदित्य परसाई गिटार विशाल सागर ने संगत की स्वागत करने वालों में पं भवानी शंकर शर्मा,ृमहेश कुमार पालीवाल,राम बाबू तिवारी,अवधेश कुमार तिवारी, बलराम पटेल, निर्भय राजपूत, सहित अन्य लोगों ने किया। कार्यक्रम से पूर्व भजनांजली में भजन गायक सुरभि वशिष्ठ ने बिदुं महाराज के भजन की प्रस्तुति दी।