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    रेलवे स्टेशन की सफाई व्यवस्था पुराने ढर्रे पर लौटी

    Published: Thu, 15 Mar 2018 04:07 AM (IST) | Updated: Thu, 15 Mar 2018 04:07 AM (IST)
    By: Editorial Team

    फाइल 4 पेज 15 की लीड

    - निजी हाथों में व्यवस्था पिᆬर भी नहीं बदले हालात

    फोटो-14होश06

    कैप्शन। होशंगाबाद रेलवे स्टेशन।

    होशंगाबाद। पिछले माह 5 फरवरी को निरीक्षण के लिए आए पश्चिम मध्य रेलवे के जीएम गिरीश पिल्लई भले ही होशंगाबाद स्टेशन को नीट एंड क्लीन स्टेशन का दर्जा देकर चले गए, लेकिन अब स्टेशन को देखने के बाद ऐसा नहीं लगता है कि इस तमगे के लायक ये स्टेशन है। प्लेटफार्म पर घूमते आवारा मवेशी, टिकट घर में आराम फरमाते कुत्ते, दीवारों पर पान और गुटखे के पीक के दाग और सेकेण्ड क्लास वेटिंग हाल में भिनभनाते मच्छर और मख्खियां स्टेशन की साफ-सफाई व्यवस्था की पोल खोल देते हैं। ओर तो ओर मशीनों से दिन में दो मर्तबा क्लीनिंग होने के बाद भी दोनों प्लेटफार्मों का कवर्ड एरिए का फर्श जीएम की विजिट की तरह चमकता नजर नहीं आता है।

    पुराने ढर्रे पर लौटी सफाई व्यवस्था

    स्टेशन की साफ-सफाई व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपे तीन माह से ज्यादा का समय हो गया है। ठेकेदार के पास दोनों प्लेटफार्म के लिए फर्श क्लीन करने दो मशीन और एक दर्जन से ज्यादा सफाई कर्मचारियों का स्टाफ है। ठेके की शर्तों के मुताबिक सफाई एजेंसी को दिन में दो मर्तबा प्लेटफार्म की मशीनों से क्लीनिंग करना है। इसके साथ ही वेटिंग हाल, टिकट घर हाल, मुसाफिर खाना की सुबह शाम क्लीनिंग करना है। परंतु यहां की साफ-सफाई को देखकर ऐसा नहीं लगता कि दो बार क्लीनिंग हो रही है।

    डस्टबिन तक नहीं होती खाली

    स्टेशन क्षेत्र में जगह-जगह रखे डस्टबिन के कचरे का निस्तारण दो बार होना चाहिए, लेकिन इनसे से 24 घंटे में भी कचरा खाली किया जाता हो ऐसा कचरे से भरी डस्टबिनों को देखकर नहीं लगता। यात्रियों द्वारा डस्टबिन में डाले गए खाद्य सामग्री के अवशेष को खाने के लालच में आवारा मवेशी और कुत्ते प्लेटफार्म पर डेरा जमाये रहते हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर ये मवेशी और कुत्ते अंदर आ कैसे जाते हैं। यह इसलिए क्योंकि जीएम की विजिट से पहले मवेशियों के आने वाले हर रास्ते पर काऊ केचर लगाये गए थे।

    झाड़ू तक नहीं लगती

    दोनों प्लेटफार्म का कवर्ड एरिया 61 मीटर का है। जबकि शेष 6 सौ मीटर लंबाई वाले प्लेटफार्म की फर्श सामान्य है। इस पर रोजाना झाडू लगना चाहिए और माह में कम से कम एक बार धुलाई होनी चाहिए। जानकार बताते हैं कि जीएम की विजिट के बाद एक बार भी पूरे प्लेटफार्म की धुलाई नहीं हुई है। दोनों प्लेटफार्म के बाहरी क्षेत्र की साफ-सफाई की ओर भी मानीटरिंग करने वालों का ध्यान नहीं है। यदि होता तो प्लेटफार्म 2 के बाहर टाइल्स की गंदगी और पान, गुटखे की पीक से बदरंग दीवार उन्हें जरूर दिखाई देती।

    बाक्स

    कालोनी की सफाई व्यवस्था बद्तर

    रेलवे कालोनी के जिस नवनिर्मित आवासों का जीएम ने निरीक्षण किया था। एक माह बाद वहां की सफाई व्यवस्था के हाल पुराने ढर्रे पर पहुंच गई है। सड़क पर और उसके दोनों ओर पड़ा कचरा नियमित नहीं उठने के कारण कूड़े के ढ़ेर जैसा दिखता है। कालोनी के अंदरूनी हिस्से और प्लेटफार्म एक की ओर बने रेलवे आवास की सफाई व्यवस्था के हाल तो और भी बद्तर है।

    इनका कहना है

    स्टेशन और सर्कुलेटिंग एरिया की साफ-सफाई के लिए मैकेनाइज्ड क्लीनिंग और निजी एजेंसी तैनात किया गया है। यदि वह प्रापर काम कर रहा है कि नहीं इसकी मानीटरिंग एसएस को करना चाहिए।

    आईए सिद्वीकी, पीआरओ

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