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विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस पर विशेष-

उपभोक्ताओं के संरक्षण पर जबावदार अफसर नहीं देते ध्यान

-बिजली,राशन,फोन और आवश्यक कार्यों को लेकर उपभोक्ता होते हैं परेशान

होशंगाबाद। उपभोक्ताओं के हित में शासन ने नियम तो बहुत बनाए हैं। लेकिन उन नियमों का पालन कराने वाले जबावदार अफसर ही ध्यान नहीं देते हैं इस कारण उपभोक्ता परेशान होते हैं। फिर ऐसे में जागो ग्राहक जागों का नारा बेमानी सिद्घ होता है। शासन स्तर पर वर्ष में एक दिन 15 मार्च को भले की उपभोक्ता संरक्षण दिवस मना कर या कार्यशाला आयोजित कर उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने के लिए प्रेरित करने की बात कही जाती हो लेकिन शासन प्रशासन में बैठे जबावदार अफसर ही उपभोक्ताओं को उनके हक से बंचित करने में लगे रहें तो फिर उपभोक्ताओं को जागरूक रहना किस काम का।

अंगूठा निशानी नहीं मिलने से परेशानी

बीते दो माह से शहर के 33 वार्ड के करीब दो हजार गरीब उपभोक्ताओं के नाम गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली सूची से कट जाने पर उन्हें उचित मूल्य की दुकान से मिलने वाले राशन से बंचित होना पडा है। कईओं के आधार कार्ड नहीं मिलने या उनके अंगूठे का निशान नहीं मिलने का बहाना बनाकर इन उपभोक्ताओं के संरक्षण के लिए शहर के अनेक पार्षदों ने वार्ड के नागरिकों की इस मांग के लिए बार बार आवाज उठाई लेकिन प्रशासन ने नहीं सुनी।

तीन हजार से ज्यादा नाम कटे

शहर के हर वार्ड में रहने वाले सैंकडों गरीब परिवार के राशन उपभोक्ताओं के नाम कट जाने से वाडोर् के कई वास्तविक नागरिक है। बीते जनवरी माह से परेशान हैं। कई वास्तविक गरीब परिवार के लोगों को राशन नहीं मिलने से वे परेशान हैं। पार्षद श्रीप्रकाश शर्मा ने बताया कि उनके वार्ड से ही करीब 180 लोगों के नाम कटे हैं। इसी तरह और भी अनेक पार्षदों के नाम कटे हैं।

नाम है पर राशन नहीं मिलता

उपभोक्ता अवध केवट का कहना है कि उसका नाम गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली सूची में है। राशन कार्ड भी है लेकिन उसका आधार कार्ड गुम जाने के बाद उसके नाम की पर्ची नहीं मिल रही है। इसी तरह एक गरीब उपभोक्ता भंवर लाल मेहरा ने बताया कि वह जब राशन लेने जाता है तो उसके अंगूठे की निशानी मशीन में नहीं मिलती है इस कारण राशन से बंचित हो रहा है।

मीटर बदलने में टालम टोली

बिजली कंपनी के उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रानिक मीटर में गडबडी बनी रहने के कारण अनाप शनाप बिल थमाए जाने की आम शिकायतें है। उपभोक्ताओं के द्वारा मीटर बदलने की मांग करने के बाद भी मीटर बदलने में कंपनी के अधिकारी टालमटोली कर रहे हैं। कोठीबाजार निवासी एके शर्मा, प्रदीप शुक्ला ने बताया कि मीटर में गडबडी होने की लिखित शिकायत करने के बाद भी कं द्वारा मीटर बदलने में टालमटोली की जा रही है।

बिल सुधार कराने में दिक्कतें

कई उपभोक्ताओं का बिजली कंपनी के मीटर रीडर द्वारा अंदाजमार रीडिंग दिए जाने पर ज्यादा बिल आ रहा है। इसे सुधरवाने या अधिकारियों को अवगत कराने के लिए जब उपभोक्ता कार्यालय जाते हैं तो अधिकारी नहीं मिलते हैं। इस कारण उपभोक्ता परेशान होते हैं। एक उपभोक्ता केशव रायकवार जब बिल सुधरवाने पहुंचा तो कोई अधिकारी नहीं मिला।

कर्मचारी कम होने से उपभोक्ता परेशान

शहर के मुख्य डाकघर में अपने कार्यों के लिए पहुंचने वाले उपभोक्ताओं को डाकघर के कर्मचारियों की कमी का खामियाजा भुगतना पडता है। यहां पर अनेक काउंटर खाली पडे रहते हैं। या फिर कर्मचारी कहीं भी चले जाते हैं। लोगों को डाक से संबंधित सामग्री जिसमें टिकिट, लिफ ाफे या अन्य कोई कार्य के लिए खडे रहना पडता है। बिजली के बिल जमा करने के लिए भी एक ही काउंटर खोला जाता है। जिसमें लंबी लंबी लाइन में लगना पडता है।

बीएसएनएल में परेशानी

बीएसएनएल कं पनी के उपभोक्ता भी कंपनी के द्वारा दिए जाने वाले उपकरण को लेकर खासे परेशान होते हैं। चाहे वह लेंड लाइन फोन हो उसकी सामग्री हो या फिर पिं्रंटर का मामला हो, ब्राड बैंड लेना हो, नेट की समास्या संबंधित जानकारी देना हो कार्यालय के बार बार चक्कर लगाने पडते है। यहां के अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं।

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उपभोक्ता फोरम 700पेंंिडंग

हाईकोर्ट द्वारा जून में उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने वाले मजिस्ट्रेटों की वापसी की थी इस कारण से उपभोक्ता फ ोरम में लगने वाले प्रकरणों की सुनवाई पेडिंग होती गई। उपभोक्ता फोरम के कार्यालय अधीक्षक राजेश सोनी से चर्चा करने पर उनके द्वारा बताया गया कि उपभोक्ता फोरम में करीब 700मामले पेडिंग हैं।

मिलान का मौका दे रहे हैं-

बिलों में कि सी तरह की गडबडी है, बकाया रह गया है। जमा के बाद भी बकाया बताया जा रहा है ऐसे उपभोक्ताओं पर प्रकरण बनाए जाने से पहले एक बार मिलान का मौका दिया जाता है, जो उपभोक्ता कार्यालय आकर पुराना जमा बिल लेकर आते हैं। उसमें से मानइस कर दिया जाता है। कार्यालय के साथ पᆬील्ड का कार्य भी जुडा है इस कारण दफ्तर में नहीं मिल पाते होंगे।

एसके शर्मा, कार्यपालन यंत्री विवि कंपनी